शिक्षामित्रों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट में शिक्षामित्रों के समायोजन के मामले में सुनवाई बुधवार को पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद अपना सला सुरक्षित रख लिया। पक्षकारों को दलीलें दाखिल करने के लिए कोर्ट ने सात दिन का समय दिया है। उत्तर प्रदेश के 1 लाख 75 हजार शिक्षा मित्रो का समायोजन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 12 सितंबर 2015 को रद्द कर दिया था जिसके खिलाफ शिक्षा मित्र और उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।

आज खास बात यह थी कि शिक्षामित्रों के मामले में सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति आर्दश कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ में से जस्टिस ललित तीन तलाक के मामलों को सुन रही संविधान पीठ का भी हिस्सा हैं। इसलिए तीन तलाक मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद शाम 4.10 पर शिक्षामित्रों के मामले की सुनवाई के लिए पीठ बैठी। सुनवाई के दौरान शिक्षामित्रों के वकीलों ने कोर्ट से कहा कि सहायक शिक्षक के मामले में कोर्ट ने नियुक्त हो चुके शिक्षकों को नहीं छेड़े जाने की बात कही है। इस मामले में भी कोर्ट जिनकी नियुक्ति हो चुकी है उन्हें न छेड़े। इस मामले में भी कोर्ट जिनकी नियुक्ति हो चुकी है उन्हें न छेड़े। शिक्षामित्रों के पास शैक्षणिक योग्यता के अलावा 17 साल पढ़ाने का अनुभव भी है।

इस पीठ ने कहा कि वह उन्हें नहीं छेड़ रहे हैं। शिक्षामित्रों के वकील सलमान खुर्शीद ने कोर्ट से यह भी कहा कि अगर जरूरी योग्यता की बात है (जैसे टीईटी) तो कोर्ट उन्हें उसे पूरा करने के लिए कुछ समय दे सकता है। कोर्ट को बताया गया कि हाई कोर्ट ने शिक्षा मित्र समायोजन रद करते समय बहुत से पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया है। कोर्ट ने सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

यह मामला 172000 शिक्षामित्र को सहायक अध्यापक के तौर पर समायोजन का है। अभी तक 132000 शिक्षामित्र सहायक शिक्षक के तौर पर समायोजित हो चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट के आदेश पर रोक के चलते काम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश द्वारस्थ बीटीसी शिक्षा संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल कुमार यादव का कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद है।

एकेडेमिक भर्ती पर 19 मई को होगी सुनवाई : सहायक अध्यापक की ऐकडेमिक रिक्रूटमेंट के मामले में कोर्ट 19 मई से सुनवाई करेगा। यह मामला 90000 सहायक अध्यापक भर्ती से जुड़ा है।Shikshamitra supreme court decision safe

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