सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर शिक्षा मित्रों के मन में बेचैनी का माहौल

सभी को पता है कि shikshamitra samayojan मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और Hon’ble Supreme Court ने उत्तर प्रदेश के shikshamitra मामले का फैसला सुरक्षित रखा है। shikshamitron के समायोजन पर Hon’ble Supreme Court कभी भी अपना फैसला सुना सकता है। लेकिन Supreme Court से आने वाले फैसले में हो रही देरी ने shikshamitron की बेचैनी बढ़ा रखी है। बेचैनी होना भी जायज है क्योकि ये फैसला shikshamitra के पुरे भविष्य का फैसला करेगा। हर वक्त उनके मन में बस एक ही सवाल चलता रहता है कि आखिर कब सुप्रीम कोर्ट उनके भविष्य पर अपना फैसला सुनाएगा। जिस से उनके भविष्य का अंधकार मिट जाये।

shikshamitron पर सुप्रीम कोर्ट से आने वाले फैसले में इतनी देरी क्यों हो रही है। जब सुनवाई पूरी हो गई है। लेकिन इन सवालों का कोई भी जवाब नहीं मिलता। वहीं अगर जानकारों की मानें तो नियम ये भी है कि सुप्रीम कोर्ट अपने किसी भी फैसले को 6 महीने तक सुरक्षित रख सकता है। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में कोई ऐसा मन बनाया है तो शिक्षा मित्रों को फैसले के लिए काफी और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश के लगभग पौने दो लाख shikshamitron का sahayak adhyapak पद पर समायोजन कर दिया गया था। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट को अपना डिसीजन सुनाना है। सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उसके बाद से ही उत्तर प्रदेश के 1 लाख 72 हजार शिक्षा मित्रों को कोर्ट के फैसले का बेसब्री इंतजार है। सुप्रीम कोर्ट में शिक्षा मित्रों के मामले में जस्टिस आदर्श गोयल और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने सुनवाई पूरी की थी।

मानवीय आधार पर शिक्षा मित्रों को राहत दी जाए: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिक्षा मित्रों के वकीलों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि सरकारी स्कूलों में ये लगातार कई सालों से अध्यापन का कार्य रहे हैं। इसलिए मानवीय आधार पर शिक्षा मित्रों को राहत दी जाए और सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन को रद्द न किया जाए। क्योंकि उम्र के इस पड़ाव पर शिक्षा मित्रों के लिए लगभग सभी रास्ते बंद हो चुके हैं। सरकारी स्कूूलों में अध्यापकों की कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया था। शिक्षामित्रों के पास योग्यता के अलावा 17 साल का लंबा अनुभव भी है। शिक्षा मित्रों की ओर से वकीलों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से शिक्षा मित्रों को राहत मिलनी चाहिए।

बच्चों की शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय – सुप्रीम कोर्ट: शिक्षामित्र मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चों की शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण विषय है और शिक्षा की गुणवत्ता से हम किसी को भी खिलवाड़ करने नहीं देंगे। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के लिए पूरी तरह से कटबद्ध है और उसकी पूरी जिम्मेदारी है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की काबिलियत को देखते हुए उनकी नियुक्ति की जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि शिक्षा मित्र काबिल नहीं हो सकते, ऐसा नहीं है। शिक्षामित्र भी काबिल हो सकते हैं और दूसरे शिक्षकों में भी काबिलियत हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों के बाद शिक्षा मित्रों के समायोजन पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जिसके बाद से अब शिक्षा मित्रों और राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का बेसब्री से इंतजार है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा मित्रों समायोजन रद्द किया था: आपको याद दिला दें कि 12 सितंबर 2015 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1 लाख 72 हजार शिक्षा मित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर हुआ समायोजन रद्द कर दिया था। जिसके बाद हाईकोर्ट के इस फैसले की खिलाफत करते हुए यूपी सरकार और शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दरअसल सुप्रीम कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक के चलते ही यूपी के प्राइमरी स्कूलों में Assistant teacher के पद पर समायोजित हो चुके 1 लाख 32 हजार शिक्षा मित्र पढ़ा रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला शिक्षा मित्रों के पक्ष मेंसुनाता है या इनके खिलाफ।

पढ़ें- नहीं बढ़ा 32 हजार शिक्षामित्रों का मानदेय

When the decision about Supreme Court decision will come to rest in peace with Shiksha Mitra

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