लखनऊ से दिल्ली तक जुड़े हैं शिक्षक भर्ती घोटाले के तार

जनपद मथुरा में शिक्षक भर्ती गिरोह ने परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक की नौकरी रेवड़ी की तरह बांटी। मथुरा जनपद में जुगाड़ नहीं बना तो पड़ोसी जनपद हाथरस सहित अन्य जिलों में लगवा दी। भाई भाभी को ही नहीं साले साली को भी परिषदीय शिक्षक बनवा दिया अब ऐसे लोग विभागीय चर्चा में है। शिक्षक भर्ती गिरोह शिक्षा विभाग में इस कदर फैला हुआ है कि नौकरी रेवड़ी की तरह बांटी गई है। चार वर्ष के दौरान इस गिरोह के सदस्यों ने पहले खुद को शिक्षक बनाया फिर अपने निकट के रिलेटिव को शिक्षक बनबाया हलाकि विभाग में ऐसी चर्चा है कि गिरोह के मुख्य सदस्यों को मथुरा में नियुक्ति का मौका नहीं मिला तो अधिक मेरिट वाले पडोसी जिला हाथरस में डॉक्यूमेंट की कालाबजारी से शिक्षक बन गए। भाई और बहन को भी शिक्षक बनबा लिया। शादी हुई तो पत्नी को भी शिक्षक बनवा दिया। इसके बाद साली और साले भी शिक्षक हो गए। इस गिरोह की जड़े पूरी तरह जमने के बाद राया ब्लॉक सहित आसपास के लोगो को मथुरा के साथ प्रदेश के अनेक जिलों में नियुक्तियां करा दी गई है। 10 से 15 लाख के इस खेल में अब यह गिरोह भूमिगत हो गया है।

शिक्षक भर्ती घोटाले के तार लखनऊ से लेकर दिल्ली तक जुड़ रहे है। एसआईटी की जाँच में अभी तक जो साक्ष्य मिले है उसके आधार पर उसमें कई रिटायर और मौजूदा अधिकारियों की संलिप्तता होने के पुख्ता सबूत मिल रहे है। इस रैकेट से जुड़े कई लोग लखनऊ से लेकर दिल्ली तक में सक्रिय है। साल 2014 से लेकर अब तक जो भर्तियां हुई है। उसमें फर्जी शिक्षक निकलने वाले शिक्षकों को इस के रैकेट माध्यम से ही फ़र्ज़ी सर्टिफिकेट उपलब्ध कराए गए है। उत्तर प्रदेश में पिछले चार वर्षों में तीन सबसे बड़ी भर्तियां हुई है। इनमें एक 12480 की है दूसरी 15000 की और तीसरी 29330 की है। इन सभी भर्तियों में फर्जी प्रमाण पत्र लगाए गए है। बीटीसी बीएड और टीईटी तक के डॉक्यूमेंट जाली पाए जा रहे है। मथुरा में ही 12480 शिक्षक भर्ती में 35 शिक्षकों के डॉक्युमेंट फर्जी पाए जा चुके है जबकि 29330 वाली भर्ती में 100 शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्ज़ी मिले है।

शिक्षक भर्ती घोटाले की जाँच शुरू हो गयी है। मथुरा में शिक्षक भर्ती मामले की जाँच के लिए एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने एसआईटी गठित कर दी है। इस गठित एसआईटी कमिटी में एसपी देहात, सीओ महावन, सीओ सदर, इंस्पेक्टर राया और इंस्पेक्टर कोतवाली को शामिल किया गया है। अभी तक की जाँच में जो सामने आया है उसके मुताबिक इस भर्ती मामले के तर लखनऊ ने लेकर दिल्ली तक जुड़ रहे है। इस रैकेट से जुड़े लोग इन शहरों में बैठकर पूरा नेटवर्क चला रहे है। इन लोगों ने ही फर्जी प्रमाण पत्र उपलब्ध कराये है। शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी और बाबू भी जाँच के घेरे में आ गए है। एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने बताया जैसे जैसे जाँच आगे बढ़ रही है वैसे वैसे रैकेट सामने आता जा रहा है। वो लोग भी सामने आ रहे है जिन्होंने पैसा लिया है। पंद्रह लाख में सौदा किया गया था।

एसटीएफ कर रही छापेमारी: 12 हज़ार 248 की भर्ती की जाँच एसटीएफ भी कर रही है। एसटीएफ ने पिछले पांच दिनों के भीतर मथुरा के साथ साथ प्रदेश के कई जिलों में छापेमारी की है पुलिस की सक्रियता बढ़ने से इस रैकेट से जुड़े लोग फरार हो गए है। कुछ शिक्षकों के नाम भी सामने आ रहे है । इन्होने अपने रिलेटिव और फॅमिली मेंबर को भर्ती कराया है

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