शिक्षक बनाते बिल बाबू करते मौज

परिषदीय स्कूलों में तैनात शिक्षकों का वेतन बिल बनाने का काम शिक्षकों से लिया जा रहा है। परिषद में तैनात बाबू मोज़ कर रहे है। लेकिन परिषदीय स्कूल के शिक्षकों से वेतन बिल बनबाने का काम लेना अब विभागीय अधिकारिओं को महगा पड़ सकता है। शासन ने वेतन बिल का काम शिक्षकों से न करने का निर्देश दिया है और अब यह काम केवल बाबू ही करेंगे। इसके वावजूद भी कोई शिक्षक वेतन बिल काम करते पाया गया तो बीईओ के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी

जिले के 1902 प्राथमिक एव 746 उच्च प्राथमिक विद्यालय है। इन स्कूलों में हज़ारों शिक्षकों की तैनाती है। 13 बीआरसी एव दो नगर शिक्षा क्षेत्र स्थापित है। प्रत्येक शिक्षा क्षेत्र में शिक्षण व्यवस्था व कार्य की जिम्मेदारी बीईओ की है। लेकिन बीईओ अपने चाहते शिक्षकों से ही वेतन बिल बनबाने का काम लेते है। ऐसी ही शोषण किये जाने बाली शिकयतें शासन स्तर तक पहुंच गई है। शिकायतों को संज्ञान में लेते शासन ने वेतन बिल शिक्षकों से न बनबाने का निर्देश जारी किया है।

वेतन बिल बनाने में होगी लापरवाही : अमूमन देखने को मिलता है कि शिक्षकों द्वारा वेतन बिल बनाने में मनमानी बरती जाती है। शिक्षकों से वेतन बिल बनबाने में सुविधा शुल्क की मांग की जाती है। इसके अलावा शिक्षकों से वेतन बिल सुविधा शुल्क न मिलने पर देरी कर दी जाती है। चाहते शिक्षकों के बिल पहले बनाये जाते है। ऐसी तमाम प्रकार की बातें बहार सुनने को मिलती है लेकिन शिक्षक भी दबाब को लेकर शिकायत नहीं करते है। लेकिन उनके जेहन में यह मलाल बना रहता है। यदि इस व्यवस्था पर सख्ती से पालन होता तो शिक्षकों के लिए बेहतर होता।

वेतन बिल बनवाने में सहयोग के लिए शिक्षको को लगाया गया है। वैसे तो यह काम बाबू जी करते है। उन्ही को करना भी चाहिए। शिक्षकों से वेतन बिल न बनवाने का काम न लेने सम्बन्धी निर्देश अभीतक नहीं प्राप्त हुआ है। यदि इस तरह के निर्देश प्राप्त होते है तो शिक्षको से काम के लिए सहयोग नहीं लिया जायेगा- शिवेंद्र प्रताप सिंह BSA

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