स्कैन कॉपिया दूसरे दिन भी नहीं बांटी जा सकीं

68500 शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में गड़बड़ी उजागर होने के बाद से परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में सब कामकाज ठप हो गया है। शासन द्वारा गठित उच्च स्तरीय टीम के जाँच करने से सभी अधिकारी व कर्मचारियों ने अन्य कार्यो से तौबा कर लिया है। स्कैन कॉपी के लिए परीक्षा नियामक कार्यालय में अभ्यर्थी लगातार आवेदन कर रहे है। लेकिन, दूसरे दिन मंगलवार को भी स्कैन कॉपी का वितरण नहीं हो सका है। इससे अभ्यर्थियों में नाराजगी है। हाईकोर्ट ने 39 याचिकाकर्ताओं को उत्तर पुस्तिका वितरण कराने का निर्देश दिया है। इस स्थिति में हाईकोर्ट के आदेश का भी अनुपालन नहीं हो पा रहा है। इसके लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों के अभ्यर्थी यहां डेरा डाले हैं। अभ्यर्थी अनूप सिंह, विशाल प्रताप, अजमल, नंदलाल आदि ने बताया कि नए नए सचिव ने कहा कि वह इस मामले में शासन का निर्देश लेकर ही आगे की कार्रवाई करेंगे। उधर, सचिव अनिल भूषण ने कहा कि कार्यालय से अब स्कैन कॉपी का वितरण नियमानुसार शुरू किया जाएगा। जिस तरह से लोगों ने आवेदन किए हैं उसी तरह से स्कैन कॉपी भी दी जाएगी।

बीटीसी का रिजल्ट जारी करेंगे: सचिव ने यह भी आश्वस्त किया है कि बीटीसी 2015 तृतीय सेमेस्टर, डीएलएड 2017 प्रथम सेमेस्टर आदि का रिजल्ट जल्द जारी करने का प्रयास होगा। इसके लिए बुधवार से लंबित कार्यो को गति देने की रणनीति बनाएंगे। जल्द ही सारी स्थिति सामान्य हो जाएगी।

टीईटी का जिम्मा संभाल रही एजेंसी पर उठे चुके हैं सवाल : परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में कार्य करने वाली एजेंसी पहली बार निशाने पर नहीं आई है, बल्कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में कार्य कर रही कई एजेंसियों पर गंभीर आरोप लग चुके हैं। यह अलग बात है कि अफसरों ने हर बार अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया।

यूपीटीईटी 2017 की परीक्षा व परीक्षा रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी पर सवाल उठ चुके हैं। शिकायत मिलने के बाद एससीईआरटी के तत्कालीन निदेशक डॉ. सर्वेद्र विक्रम बहादुर सिंह ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी से आख्या मांगी थी। निदेशक से शिकायत की गई थी कि टीईटी 2017 का आयोजन व परीक्षा रिजल्ट का कार्य ऐसी एजेंसी को दिया गया। जिस पर माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड की टीजीटी-पीजीटी 2013 परीक्षा और टीईटी 2013 परीक्षा व परीक्षा रिजल्ट संबंधी कार्य में बड़े स्तर पर गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे थे।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद निदेशक ने सचिव से इस मामले में स्पष्ट आख्या परिषद कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। टीजीटी-पीजीटी 2013 की परीक्षा की ओएमआर सीट भी जांची इसी एजेंसी ने की थी। शिकायत मिलने के बाद पूर्व अध्यक्ष हीरालाल गुप्ता ने चयन बोर्ड में रखी ओएमआर सीट के आधार पर जांच कराई तो काफी गड़बड़ी सामने आई थी। इस पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी रहीं सचिव डा. सुत्ता सिंह का कहना था कि शासनादेश के तहत एजेंसी के चयन का कार्य पूरी तरह गोपनीय होता है। शिकायत पूरी तरह काल्पनिक है।

कोर्ट के सुझाव की अनदेखी: से पहले हुई टीईटी के सवालों पर विवाद हाईकोर्ट तक पहुंचा था। उस समय कोर्ट ने तत्कालीन सचिव से पूछा था कि क्या उन्होंने प्रश्नपत्र तैयार करने से पहले देखे नहीं थे। इस पर उन्होंने गोपनीयता का हवाला देकर प्रश्नपत्र देखने से इन्कार किया था।

टीईटी के विज्ञापन और आवेदन पर संशय : परीक्षा नियामक कार्यालय को आगामी टीईटी के लिए 15 सितंबर को विज्ञापन और 17 सितंबर से ऑनलाइन आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू करना था। जिस तरह से शासन ने पिछले दिनों कार्रवाई की है उसके बाद से नई प्रक्रिया शुरू होने पर कुछ विलंब होने के आसार हैं लेकिन, किसी भी कार्य में बहुत देरी नहीं होगी।

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परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर मंगलवार को स्कैन कापियां न मिलने से निराशा की मुद्रा में बैठे अभ्यर्थी।

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