शिक्षामित्र एक जून को लखनऊ में सत्याग्रह करेंगे

शिक्षामित्रों का समायोजन सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त किये जाने के बाद से शिक्षा मित्रों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। समायोजन रद्द होने के बाद 500 से ज्यादा शिक्षामित्र आत्महत्या कर चुके हैं लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। जो नेता इलेक्शन के टाइम पर उनसे बड़े बड़े वादे कर के गए थे वो भी नज़र नहीं आ रहे है। शिक्षामित्रों ने कई बार प्रदेश की राजधानी से लेकर देश की राज राजधानी तक आंदोलन किया मगर उन सबका कोई निष्कर्ष नहीं निकला। आंदोलन के क्रम को आगे बढ़ाने और अपनी मांग “समान कार्य, समान वेतन” को मनवाने के लिए एक बार फिर शिक्षा मित्र लखनऊ का रुख करने की तैयारी कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की बैठक रोटी गोदाम स्कूल में हुई। जिलाध्यक्ष रत्नाकर दीक्षित ने कहा कि 25 जुलाई 2017 को शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त होने के बाद दिल्ली और लखनऊ तक आंदोलन हुआ। जिसमें प्रदेश सरकार ने पांच सदस्यीय कमेटी बनाकर रिपोर्ट सरकार को देने के लिए कहा था। वह रिपोर्ट अब तक नहीं दी गई। केंद्र सरकार के जारी आदेश को यूपी सरकार लागू नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रांतीय आह्वान पर एक जून से शिक्षामित्र सत्याग्रह के लिए तैयार हैं। 30 मई को सभी ब्लाकों पर 11 से एक बजे के बीच बीआरसी केंद्रों पर बैठक होगी। जिले से करीब तीन हजार शिक्षामित्र लखनऊ ले जाने का लक्ष्य है। हर ब्लाक से दो सौ शिक्षामित्रों अपने माध्यम से पहुंचे। जिला महामंत्री रामपूत पाल ने कहा कि संघ बीईओ ड्यूटी का पूरी तरह से बहिष्कार करता है। बैठक में आलोक वर्मा, बृजेश मिश्रा, राजीव यादव, अवधेश यादव, सचिन मिश्रा, ऊषा मिश्रा, मुकेश पाल, रामकरन वर्मा, अरूण शुक्ला, वीना सिंह, अरूण शुक्ल, जितेंद्र वर्मा, धर्मपाल सिंह मौजूद रहे। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की बैठक सोमवार को सदर ब्लाक परिसर में सम्पन्न हुई। इसमें संगठन की मजबूती समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। साथ ही आगामी एक जून से लखनऊ में आयोजित धरने की सफलता को लेकर विचार किया गया। इसके अलावा शिक्षामित्र संगीता सिंह को सर्वसम्मति से जिला महिला प्रभारी बनाया गया।

शिक्षामित्र लखनऊ में करेंगे धरना प्रदर्शन: बैठक में मंडल अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव के समय शिक्षामित्रों की समस्याओं को तीन माह में न्यायोचित तरीके से समाधान करने का वादा अपने लोक कल्याण संकल्प पत्र में रखा था। लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी शिक्षामित्रोंं की समस्या जस की तस बनी हुई है। सरकार को वादा याद दिलाने के लिए लखनऊ में एक जून से धरना प्रदर्शन किया जाएगा। अध्यक्ष इंद्रजीत यादव उर्फ अजीत ने कहा कि 1999 में तत्कालीन कल्याण सिंह की सरकार ने शिक्षा मित्र योजना लाकर पूरे प्रदेश के प्राथमिक विद्यालय में तैनाती देकर गांव के गरीब, किसान, मजदूर के बच्चों को शिक्षित करने का संकल्प लिया था। इसे शिक्षामित्रों ने पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ उठाया। लेकिन वही शिक्षामित्र आज दर-दर की ठोकरें खाने को विवश हैं। कहा कि हक और अधिकार के लिए शिक्षामित्रों ने हमेशा संघर्ष किया है। बैठक में बृजेश मौर्य, नर्वदेश्वर मिश्रा, रामकरन, बृजमोहन, दिलीप, सत्येंद्र, ज्योति, सुमन, श्यामदुलारी, प्रमिला, रीना सिंह, अरविंद, प्रभाकर, जेपी पांडेय, पवन, आलोक, अभिषेक, प्रशांत, सैयद यूनूस, राजेश, धर्मेंद्र आदि शिक्षामित्र उपस्थित रहे।

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