राज्य सरकार समायोजित शिक्षा मित्रों को 25 जुलाई तक का वेतन देगी

uttar pradesh government 1.37 lakh samayojit shikshamitra को 25 जुलाई तक sahayak adhyapak का वेतन देगी। basic shiksha parishad के सचिव संजय सिन्हा ने शनिवार को अभी जिलों के basic education officer और वित्त एवं लेखाधिकारियों को इस विषय में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस निर्देश एक बात साफ हो गई है कि 25 जुलाई के बाद अब शिक्षामित्रों को केवल मानदेय से ही संतोष करना पड़ेगा लकिन शिक्षामित्रों का मानदेय कितना होगा अभी तक विभाग स्पष्ट नहीं कर पाया है। लेकिन समायोजन से पहले shiksha mitra को 3500 रुपये मानदेय दिया जा रहा था। samayojan nirasta होने से सभी जिलों का वेतन भुगतान बाधित हो गया था। शिक्षामित्रों के साथ साथ दूसरे teacher का भी वेतन नहीं मिल पा रहा। कई अधिकारियों ने basic shiksha parishad सचिव से वेतन भुगतान के विषय में मार्ग दर्शन मांगा था। basic shiksha parishad सचिव के पत्र के बाद जुलाई महीने के वेतन का रास्ता साफ हो गया है।


Still the situation is not clear on the shiksha mitra mandey :
uttar pradesh shikshamitra का समायोजन रद्द करने का फैसला 25 जुलाई को दोपहर के वक्त आया था। इस लिए basic shiksha parishad sachiv ने स्थिति स्पष्ट करते हुए दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि जिस दिन सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है उस दिन तक assistant teacher post पर samayojit shikshamitra को वेतन भुगतान किया जा सकता है। इस लिए assistant teacher post पर samayojit shikshamitra को वेतन 25 जुलाई तक का वेतन दिया जायेगा और उसके के बाद शिखा मित्रों को मानदेय दिया जायेगा। लेकिन अभी तक सरकार और विभाग कि तरफ से shikshamitra mandey को लेकर को निर्णय नहीं हो पाया है कि शिक्षामित्रों को कितना मानदेय मिलेगाै।

Court canceled shikshamitra samayojan: इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सही मानते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 1.78 लाख शिक्षामित्रों की sahayak adhyapak के रूप में तैनाती को गैरकानूनी मानते हुए shiksha mitra samayojan को रद्द कर दिया था। साथ ही शिक्षा मित्रों को भारी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शिक्षामित्रों को teacher recruitment की औपचारिक परीक्षा TET Pass हैं या भविष्य में पास कर लेते हैं तो shiksha mitra को Assistant teachers के लिए होने वाली दो नियुक्ति प्रक्रिया में उन पर विचार किया जाना चाहिए। और शिक्षामित्रों को ये परीक्षा लगातार दो प्रयासों में यह परीक्षा पास करनी होगी। साथ ही यह supreme court ने यहभी कहा कि उत्तर सरकार चाहे तो shiksha mitra samayojan के पूर्व की स्थिति में shiksha mitra की सेवा जारी रख सकती है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उत्तर प्रदेश को चार साल से चल रहे इस विवाद की समाप्ति हो गई। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और यू.यू. ललित की विशेष पीठ ने 25 जुलाई को यह आदेश देते हुए कहा था कि शिक्षामित्रों के समायोजन को गैरकानूनी ठहराने वाले 2014 के allahabad High Court orders में कोई खामी नहीं है।

राज्य को आरटीई एक्ट की धारा 23(2) के तहत teacher के लिए न्यूनतम योग्यताओं को घटाने का कोई अधिकार नहीं है। आरटीई की बाध्यता के कारण राज्य सरकार ने योग्यताओं में रियायत देकर शिक्षामित्रों को नियुक्ति दी थी। पीठ ने कहा कि कानून के अनुसार ये कभी teacher थे ही नहीं, क्योंकि ये योग्य नहीं थे।

पुनर्विचार याचिका: शिक्षा मित्र हार न मानते हुए एक बार फिर शिक्षा मित्रों ने पुनर्विचार याचिका दायर करने का विचार किया है।

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