मध्य सत्र में शिक्षकों के तबादलों पर लगी रोक

इलाहाबाद : प्रदेश के अशासकीय माध्यमिक सहायता प्राप्त कालेजों में बड़े पैमाने पर गुपचुप तबादले हुए हैं। नगर निकाय की आचार संहिता लागू होने के बाद भी यह खेल पिछली तारीखों में चला। इसकी भनक लगने पर शिक्षा निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने कड़ा एतराज जताया है। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक व मंडलों में तैनात संयुक्त शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिया है कि मध्य सत्र में किसी के तबादले न किए जाएं, यदि तबादला अपरिहार्य है तो उसकी शासन से अनुमति लेना जरूरी होगा।

राजकीय हाईस्कूल व इंटरमीडिएट कालेजों में शिक्षकों के समायोजन और तबादले की प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश पर जहां की तहां रुक गई थी, लेकिन अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक कालेजों में तबादलों की प्रक्रिया अलग होने का लाभ शिक्षकों ने बड़े पैमाने पर उठाया है। असल में अशासकीय कालेजों में इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम (यथा संशोधित) 1921 के अध्याय तीन के विनिमय 55 व विनिमय 61 में दिए गए प्रावधानों के तहत होते हैं। इसमें शिक्षकों का एकल स्थानांतरण अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक व संयुक्त शिक्षा निदेशक स्तर पर गठित समिति की सहमति के आधार पर कार्रवाई की जाती है। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाता है कि शिक्षक जिस स्कूल से स्थानांतरित हो रहा है और जिस कालेज में स्थानांतरण हो रहा है, दोनों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य की सहमति व संबंधित पद की रिक्ति जरूरी है। इसी आधार पर पिछले दिनों में तमाम स्थानांतरण किए गए हैं। यही नहीं नगर निकाय की अधिसूचना जारी होने के बाद पिछली तारीखों में यह खेल चलता रहा है।

छात्र- छात्रओं का पठन-पाठन ध्यान में रख लिया निर्णय: शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. अवध नरेश शर्मा ने निर्देश दिया है कि माध्यमिक कालेजों में अब प्रायोगिक परीक्षा का कार्यक्रम घोषित होने जा रहा है। वहीं, तबादलों से यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के लिए छात्र-छात्रओं का पठन-पाठन भी बाधित होगा। इसलिए अशासकीय कालेजों के तबादले छात्रहित में रोके जाते हैं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि मध्य शैक्षिक सत्र में प्रधानाचार्य व शिक्षकों के स्थानांतरण आदेश जारी न किए जाएं। यदि परिस्थिति के कारण किसी का तबादला अपरिहार्य हो तो शासन को अवगत कराते हुए, शासन के आदेश के बाद ही स्थानांतरण किया

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