शिक्षकों के समायोजन पर उठे सवाल

इटावा : परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में समायोजन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। जिन विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुपात में शिक्षक अधिक हैं उनको समायोजित कर उस विद्यालय में भेजा जाना है जहां शिक्षकों के पद रिक्त हैं। समायोजन का आधार छात्र संख्या है और अप्रैल माह में पंजीकृत छात्र संख्या के आधार पर ही शिक्षकों को इधर से उधर किया जाना है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि अप्रैल के बाद कक्षा पांच व कक्षा आठ पास कर निकलने वाले और जुलाई में जो नामांकन बढ़े हैं उन छात्रों का हिसाब-किताब विभाग किस प्रकार करेगा।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि शासन ने इन समायोजनों को ऑनलाइन तरीके से ही करने के आदेश दिए थे, लेकिन पूरे प्रदेश के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने एक राय होकर इस आदेश की अवहेलना की। नतीजा यह हुआ कि अब समायोजन ऑफलाइन हो रहे हैं, जो भ्रष्टाचार की आशंका को प्रबल करते हैं।

प्रदेश भर में चल रहे समायोजन के तहत जनपद में 18 जुलाई तक समायोजन प्रक्रिया पूर्ण की जानी थी जबकि 18 जुलाई को तो सरप्लस शिक्षकों व रिक्तियों की लिस्ट ऑनलाइन की गई। जारी लिस्ट के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में 767 सरप्लस शिक्षक हैं और रिक्तयां 117 हैं जबकि जूनियर में 323 शिक्षक सरप्लस और रिक्तयां 421 हैं। ये आंकड़े अपने आप में विचित्र और सवाल खड़े करने वाले हैं।

समायोजन प्रक्रिया के तहत लिस्ट जारी होने के बाद सरप्लस शिक्षकों से आवेदन मांगे जाने थे, लेकिन जनपद में इसकी विज्ञप्ति प्रकाशित नहीं की गई जबकि हरदोई, औरैया आदि जनपदों में विज्ञप्ति जारी हो चुकी है। इस मामले में पीछे हमारे जनपद में समायोजन को लेकर एक सवाल यह भी है कि विज्ञप्ति जारी क्यों नहीं की गई।

क्या हैं प्रावधान: जारी आदेशों के अनुसार जूनियर अर्थात उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विषयवार अध्यापक तैनात किए जाने हैं जहां सामान्य विषय का एक, भाषा का एक और गणित या विज्ञान का एक शिक्षक होना अनिवार्य है। यदि जूनियर में विज्ञान वर्ग का मात्र एक अध्यापक है तो वह सरप्लस नहीं माना जाएगा चाहे उस विद्यालय में कितने ही अधिक संख्या में अध्यापक हों।

इसके साथ ही किसी प्राथमिक विद्यालय में यदि केवल दो ही अध्यापक हैं तो उन्हें सरप्लस की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता चाहे छात्र संख्या 30 से कम ही क्यों न हो। आशय यह कि प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में कम से कम दो अध्यापक होना अनिवार्य है। अन्य मामलों में प्राथमिक विद्यालय में 0 से 60 छात्रों के सापेक्ष दो और जूनियर में 0 से 100 छात्रों के सापेक्ष तीन शिक्षकों अनुपात ही समायोजन में मान्य होगा।

सरप्लस नहीं हैं अध्यापक: उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनोद यादव का कहना है कि छात्र-शिक्षक अनुपात का मानक सही नहीं है। प्राथमिक विद्यालयों में पांच कक्षाएं होती हैं तो पांच शिक्षक प्रत्येक विद्यालय में होने चाहिए। अप्रैल की छात्र संख्या को आधार बनाया जाना तर्कपूर्ण नहीं। बीएसए से भेंट कर इस संबंध में विरोध दर्ज कराया था, यदि इसमें सुधार न हुआ तो संघ आंदोलन करेगा।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी सिंह ने बताया कि शासन की मंशानुसार सरप्लस अध्यापकों व रिक्त विद्यालयों की सूची जनपद की एनआइसी की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। सूची सम्मिलित अध्यापकों में से जिन अध्यापकों को कोई आपत्ति हो तो वह अपना लिखित प्रत्यावेदन साक्ष्य सहित संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी को 21 जुलाई तक अनिवार्य रूप से उपलब्ध करा दे।

आधे से अधिक एडेड विद्यालयों की प्रबंध समितियां होंगी भंग

इटावा : जनपद के अशासकीय सहायता प्राप्त अर्थात एडड में लगभग 50 प्रतिशत ऐसे हैं जिनकी प्रबंध समितियों से संबंधित सूचनाएं जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। ऐसे में जिला विद्यालय निरीक्षक ने इन विद्यालयों को एक सप्ताह का अल्टीमेटम देते हुए सूचनाएं उपलब्ध कराने को कहा है। इस समय अवधि में यदि सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं तो उस विद्यालय की प्रबंध समिति का संचालन एकल कर दिया जाएगा।

गत माह जिला विद्यालय निरीक्षक ने जनपद के सभी 54 अशासकीय सहायता प्राप्त ों को जारी आदेश में उनकी प्रबंध समितियों से संबंधित सूचनाएं जैसे उसके सदस्यों की संख्या, उनका कार्यकाल, हस्ताक्षर, बैठक आदि की जानकारी निर्धारित प्रारूप में मांगी थीं। इसमें प्रबंध समिति के निर्वाचन व कार्यकाल की भी जानकारी आवश्यक रूप से मांगी गई थी। आदेश जारी होने के एक माह बीतने के बाद अभी तक मात्र 25 विद्यालयों ने सूचना दी है।

जिला विद्यालय निरीक्षक डा. देवेंद्र प्रकाश यादव ने चेतावनी सहित आदेश जारी करते हुए शेष 29 विद्यालयों से एक सप्ताह में अपेक्षित जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है। यदि ऐसा नहीं होता है तो एक सप्ताह के बाद विभागीय कार्रवाई करते हुए उस विद्यालय की प्रबंध समिति को एकल कर दिया जाएगा।’ 54 में से 29 एडेड विद्यालयों ने नहीं दी प्रबंध समिति की सूचना1 ’>>एक सप्ताह में नहीं दी जानकारी तो एकल कर दी जाएंगी समितियां

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