प्रमोशन बिना समायोजन पर उठाए जा रहे सवाल

माध्यमिक शिक्षा के अफसर अपनी नाकामी शिक्षकों के सिर बांध रहे हैं। राजकीय शिक्षकों की वरिष्ठता न होने से उनका प्रमोशन नहीं हो रहा है, इसके बजाय अफसर सरकार को शिक्षकों के समायोजन के नए-नए नुस्खे बता रहे हैं। यदि शिक्षकों की पदोन्नति हो जाये तो अधिकांश राजकीय कालेजों में समायोजन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। साथ ही शिक्षकों की पुरानी मांग भी पूरी हो जाएगी, इसके बजाय अफसर शिक्षकों से टकराव का रास्ता तैयार कर रहे हैं।

राजकीय माध्यमिक कालेजों के एलटी ग्रेड पुरुष संवर्ग का प्रमोशन पिछले तीन साल से रुका है, इसकी वजह उनकी वरिष्ठता तय न हो पाना है। विवाद इतना बढ़ा कि प्रकरण कोर्ट तक पहुंचा, अफसर कोर्ट का नाम लेकर वरिष्ठता सूची तैयार करने से बच रहे हैं, केवल कुछ महीनों के बाद मातहतों से सूची लगातार मांगी जा रही है, वह मुख्यालय पहुंच नहीं रही है।

इससे प्रमोशन प्रक्रिया अटकी है। इसी तरह से एलटी ग्रेड से प्रवक्ता के लिए भी उप्र लोकसेवा आयोग को पदोन्नति करनी है, पिछले साल व इस साल सभी शिक्षकों की गोपनीय रिपोर्ट आयोग ने मंगाई है, लेकिन वरिष्ठता सूची तैयार न होने से आयोग प्रमोशन नहीं कर रहा है।

इधर सरकार ने शिक्षकों के समायोजन का आदेश दिया है इससे राजकीय कालेज शिक्षकों में हलचल है। इसकी वजह यह है कि वर्षो से पदोन्नति न होने से कालेजों में शिक्षकों की तैनाती छात्र-शिक्षक अनुपात में नहीं रह गई है। कहीं शिक्षक नहीं है तो कहीं शिक्षकों की भरमार है। महकमा यदि पहले प्रमोशन कर दे तो तमाम कालेजों में समायोजन की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

जरूरी होने पर हो समायोजन

राजकीय शिक्षक संघ का प्रतिनिधि मंडल शिक्षक विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी व राजकीय शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ रवि भूषण के नेतृत्व में माध्यमिक शिक्षा के अपर शिक्षा निदेशक रमेश से मिला और समायोजन से पहले पदोन्नति आदि पर अमल करने की मांग की। एडी ने आश्वश्त किया कि नियमानुसार ही आवश्यक होने पर ही समायोजन किया जाएगा। यहां जुबैर अहमद ,बीएल पाल, डॉ राम धीरज आदि मौजूद थे।

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