निजी बीटीसी कालेज नहीं सुन रहे एससीईआरटी की

प्रदेश के निजी बीटीसी कालेजों में तैनात प्रवक्ताओं का फर्जीवाड़ा सामने आने लगा है। बड़ी संख्या में प्रवक्ताओं ने कई-कई कालेजों में अपना पंजीकरण करा रखा है। सभी कालेजों से उन्हें तय रकम भी मिल रही है और उन्हें कहीं जाना भी नहीं पड़ रहा है। इस फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए पांच माह पहले आदेश दिये जा चुके हैं, लेकिन तमाम कालेज उसका अनुपालन नहीं कर रहे हैं। कालेज प्रबंधक रिकॉर्ड देने में अब भी आनाकानी कर रहे हैं। प्रदेश में बेसिक टीचर्स टेनिंग यानी बीटीसी के निजी कालेज लगातार खुलते जा रहे हैं, लेकिन वहां पठन-पाठन का स्तर लगातार गिर रहा है। तमाम हिदायतों के बाद भी सुधार न होने पर पाठ्यक्रम में बदलाव हुए। ऐसा पाठ्यक्रम बनाया गया कि प्रशिक्षुओं को पढ़ना और शिक्षकों को पढ़ाना ही होगा।

इसके बाद भी शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, बल्कि प्रशिक्षु सेमेस्टर परीक्षाओं में फेल हो रहे। बीटीसी 2013 व टीईटी का परीक्षा परिणाम इसका ताजा उदाहरण है। अफसरों ने एनसीटीई से संपर्क करके उन कारणों की पड़ताल की आखिर बीटीसी कालेजों में पढ़ाई क्यों नहीं हो रही है। इसमें यह सामने आया कि एक ही प्रवक्ता कई कालेजों में पंजीकृत है और उसका पढ़ाई से कोई लेना-देना नहीं है। इन्हीं कथित प्रवक्ताओं के बलबूते बड़ी संख्या में निजी कालेज चल रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए योजना बनी कि सभी कालेजों के प्रवक्ताओं से आइडी यानी पहचान पत्र लेकर उनका आधार कार्ड NCTE की Website पर अपलोड कर दिया जाए तो वह जहां भी पंजीकृत होंगे तस्वीर सामने आ जाएगी। इसी योजना के तहत कालेज प्रबंधकों से प्रवक्ताओं का रिकॉर्ड मांगा गया, लेकिन पांच माह बाद भी गिने चुने कालेजों ने ही रिकॉर्ड मुहैया कराया है अधिकांश कालेज इसे देने में आनाकानी कर रहे हैं।

पिछले दिनों प्रदेश के छह निजी बीटीसी कालेजों ने संकाय सदस्यों को आधार से जोड़ने से बचने के लिए फर्जीवाड़ा किया था और परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव से बिना अनुमोदन लिये ही मान्यता की पत्रवली NCTE को भेज दी थी, हालांकि NCTE की सजगता से यह राजफाश हो गया, लेकिन तमाम सवाल अनुत्तरित हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव डा. सुत्ता सिंह ने बताया कि अब सभी कालेजों के प्रवक्ताओं को Adhaar से जुड़ना ही होगा।

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