स्कूलों में हाजिरी के लिए बच्चे भी करेंगे हस्ताक्षर

अंग्रेजों के जमाने से लेकर अब तक नौकरी के लिए हाजिरी में ‘पी’ (प्रजेंट) और ‘ए’ (अब्सेंट) अक्षर का प्रयोग होता आ रहा है। स्कूलों में बच्चों की हाजिरी भी इन्हीं अक्षरों के जरिये लगाई जाती है। लेकिन दशकों पुरानी यह व्यवस्था अब स्कूलों से विदा होने जा रही है। एक अभिनव प्रयोग के जरिये रुहेलखंड के दस हजार से अधिक स्कूल नजीर बनेंगे। ‘पी’ और ‘ए’ की जगह बच्चे हर दिन स्कूल में हस्ताक्षर करेंगे। कमिश्नर डॉ. पीवी जगन मोहन ने इसके लिए आदेश जारी कर दिए हैं।

नई पहल के अनुसार, बेसिक स्कूलों में कक्षा दो से लेकर आठ तक के बच्चे अपने पूरे हस्ताक्षर करेंगे। कक्षा एक के बच्चे अपने नाम का पहला अक्षर लिखेंगे। एक माह तक पहला अक्षर लिखने के बाद नाम के दो अक्षर दूसरे महीने में लिखेंगे। जब तक पूरा नाम लिखना बच्चे नहीं सीख लेते तब तक हर माह अक्षर लिखते रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि कक्षा एक के बच्चे तीन माह में हस्ताक्षर करना सीख लेंगे। यदि किसी का नाम अनिल है तो वह पहले माह में ‘अ’, दूसरे माह में ‘अ’ और ‘नि’ व तीसरे माह में ‘अ’ व ‘नि’ के साथ ‘ल’ लिखेंगे। चौथे माह में वह पूरे हस्ताक्षर अनिल के रूप में करेगा।

पहले ङिाझके फिर चेहरे पर खुशी : बरेली के प्राथमिक स्कूल सिमरा अजूबा बेगम में कक्षा तीन का छात्र शराफत कलम पकड़ने पर पहले थोड़ा ङिाझका, फिर हस्ताक्षर किए तो चेहरा खुशी से चहक उठा। कक्षा तीन के बच्चों ने भी हस्ताक्षर किए। छुट्टी के बाद बच्चों ने घर जाकर बताया तो अभिभावक भी इस नए प्रयोग के बारे में जानकर खुश हुए। इसी तरह अन्य स्कूलों में भी यह व्यवस्था धीरे-धीरे लागू हो रही है।

सीडीओ बरेली का विचार : चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर (सीडीओ) बरेली सत्येंद्र कुमार ने यह पूरी योजना बनाई कि बच्चे हर दिन हस्ताक्षर करेंगे तो नाम लिखना आ जाएगा। मिड डे मील के रजिस्टर में भी हस्ताक्षर होंगे। हाजिरी रजिस्टर से उसका मिलान होगा तो गड़बड़ी भी खत्म होगी। उन्होंने यह प्रस्ताव कमिश्नर पीवी जगन मोहन के सामने रखा। कमिश्नर को यह योजना पसंद आई और पूरे मंडल में इसे लागू करने के आदेश कर दिए। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही ‘पी’ और ‘ए’ लिखने की परंपरा की विदाई

सीडीओ बरेली की यह प्लानिंग बहुत अच्छी लगी। कक्षा एक के छात्रों को दिक्कत होगी, लेकिन वे हस्ताक्षर करना सीख जाएंगे। डॉ. पीवी जगन मोहन, कमिश्नर बरेली 

खुशी है एक नए प्रयोग को मंजूरी मिली। कमिश्नर ने सभी बेसिक स्कूलों में नई व्यवस्था लागू करने के आदेश जारी कर दिए हैं। सत्येंद्र कुमार, सीडीओ

Parishadiya School

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