गरीब बच्चे देर से निजी स्कूलों में प्रवेश पाएंगे शिक्षा का अधिकार कानून के तहत मिलेगा दाखिला

लखनऊ – विधान सभा चुनावों के कारण गरीब बच्चे प्राइवेट स्कूलों की चौखट पर समय से नहीं पहुंच पाए। ये प्रक्रिया जनवरी से ऑनलाइन शुरू की जानी थी। लेकिन इसमें देर हो जाने के चलते अब बेसिक शिक्षा विभाग प्रवेश दिलाने के लिए अप्रैल से जुलाई अभियान चलाएगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गरीब बच्चों को निजी स्कूल में प्रवेश देने को प्राथमिकता देने को कहा है। ये काम मुख्यमंत्री के 100 दिनों में किए जाने वालों कामों की सूची में भी शामिल है। लिहाजा इसे मिशन मोड में करने के निर्देश है। पहले चरण में 10 अप्रैल तक आवेदन लिए जाएंगे। इसे बीएसए 12 अप्रैल तक सत्यापन कर पोर्टल पर ब्यौरा भरेगा, इन पर 18 अप्रैल तक जिलाधिकारी लाटरी के आधार पर निर्णय लेंगे और 25

अप्रैल को बीएसए बच्चों को स्कूलों में दाखिला दिलाएंगे। दूसरे चरण में 10 मई तक आवेदन लिए जाएंगे, इनकी लाटरी 15 मई को निकाली जाएगी और बीएसए 18 मई तक प्रवेश दिलाएंगे। तीसरे व आखिरी चरण में 15 जून तक आवेदन लिए जाएंगे। इस पर 29 जून को जिलाधिकारी निर्णय लेंगे और 5 जुलाई तक निजी स्कूलों में प्रवेश दिए जाएंगे। कुछ स्कूलों में अप्रैल से सत्र शुरू हो चुका है वहीं माध्यमिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त स्कूलों में जुलाई से सत्र शुरू होना है। पिछले वर्ष राज्य सरकार ने यह काम गैर सरकारी संस्था के माध्यम से संचालित किया था। लेकिन इस बार विभाग इसे खुद कर रहा है।

पिछले वर्ष घोषणा की गई थी कि 2017 में ये काम ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से होगा और इस पर शहर के सभी निजी, मान्यताप्राप्त स्कूलों की सूची और आरक्षित सीटों का ब्यौरा होगा।

इसी पोर्टल से प्रवेश प्रक्रिया पूरी होनी थी। इस पर सभी देख सकते थे कि किस निजी स्कूल में कितने गरीब बच्चे प्रवेश पा चुके हैं। लेकिन देर हो जाने के चलते इस बार इसे ऑफलाइन किया जा रहा है।

शिक्षा का अधिकार कानून के तहत मिलेगा दाखिला : शिक्षा का अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों को कक्षा 1 या इससे पहले की कक्षा में 25 फीसदी सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं। इसमें प्रवेश लेकर बच्च कक्षा 8 तक निशुल्क पढ़ सकता है। इस पढ़ाई के लिए फीस प्रतिपूर्ति सरकार करती है। इसके लिए 400 रुपये प्रतिमाह फीस का निर्धारण किया गया है। वहीं किताब, यूनिफार्म के लिए भी सरकार आर्थिक मदद देती है।

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