बिखरते सपनों को संवारता एक शिक्षक

रुद्रप्रयाग जिले का एक अपने खर्च पर सरकारी विद्यालय को संवारने में जुटा है। उनका बस एक ही ध्येय है कि छात्रों को कोई अभाव न रहे। इस शिक्षक का नाम है चंद्रमोहन नैथानी, जो वर्तमान में अगस्त्यमुनि ब्लाक के राजकीय प्राथमिक विद्यालय ककोला में प्रधानाध्यापक हैं। उन्होंने 2013 की केदारनाथ आपदा में अनाथ हुए नौनिहालों की मदद का बीड़ा उठाया है। वर्तमान में वह 163 अनाथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च स्वयं उठा रहे हैं। इनमें कुछ बच्चे उच्च शिक्षा भी ले रहे हैं। इसके लिए वह अपने जीपीएफ तक से पैसा निकाल चुके हैं।

शिक्षक नैथानी पिछले दस वर्ष से समाज सेवा में जुटे हैं। उनकी पत्नी भी शिक्षक हैं, जिनके वेतन से घर का खर्च चल जाता है। अपना पूरा वेतन नैथानी अनाथ बच्चों की खुशहाली में लगा रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय ककोला में उनकी तैनाती नवंबर 2016 में हुई। इससे पूर्व वह राजकीय प्रावि बेडूबगड़ (अगस्त्यमुनि) में तैनात थे। वहां भी वह अपने खर्च पर बच्चों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, शैक्षणिक भ्रमण, प्रोजेक्टर से पढ़ाई, कंप्यूटर शिक्षा, अच्छी ड्रेस, बैठने लिए फर्नीचर, उच्च गुणवत्ता वाले मध्याह्न भोजन की व्यवस्था करते थे। यही वजह रही कि महज 11 छात्र संख्या वाले इस विद्यालय ने खेलकूद में राष्ट्रीय स्तर तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। नैथानी अब यही प्रयोग ककोला में कर रहे हैं।

उन्होंने विद्यालय में अपने खर्चे से एक लाइब्रेरी की स्थापना भी की है, जहां बच्चे नियमित रूप से नई-नई जानकारियां ही जाती हैं। उन्होंने हर छात्र-छात्र की व्यक्तिगत मार्कशीट तैयार की हुई है। इसमें वह बच्चे की शैक्षिक प्रगति, ब्लड ग्रुप, टीकाकरण, स्वास्थ्य की स्थिति, अच्छाई व कमी और उपस्थिति का पूरा ब्योरा दर्ज करते हैं। वह केदारनाथ आपदा में अपने अभिभावक खो चुकी चार बेटियों की शादी भी करा चुके हैं। इन शादियों का सारा खर्च उन्होंने खुद उठाया। इनमें दो बेटियों की शादी तो उन्होंने अपने घर से ही की। बकौल नैथानी, ‘ऐसी और भी बेटियां हैं। मैंने उनके परिजनों से संपर्क साधा है। मुझसे जो भी बन पड़ेगा उनकी शादी में खर्च करूंगा।’

आपदा में निभाई अहम भूमिका1केदारनाथ आपदा के दौरान राहत कार्यो के साथ ही पीड़ितों की मदद में भी नैथानी की अहम भूमिका रही। उन्होंने केदारघाटी के गांव-गांव जाकर आपदा पीड़ितों की मदद की। इस दौरान बीमारों को अस्पताल पहुंचाने में भी वह सक्रिय रहे।

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