नए आयोग में उलझी नौ हजार भर्तियां

इलाहाबाद बोर्ड, पढ़ाई व शिक्षकों का वेतनमान समान है, लेकिन शैक्षिक संस्थानों को संसाधन मुहैया कराने में बड़ा फासला है। जहां एक ओर प्रदेश सरकार राजकीय कालेजों में नौ हजार से अधिक एलटी ग्रेड शिक्षकों की नियुक्ति के लिए नियमावली में बदलाव करके भर्ती करने का निर्देश दे चुकी है, वहीं दूसरी ओर सहायता प्राप्त अशासकीय कालेजों में इतनी ही भर्तियां अधर में फंसी हैं। खास यह है कि इन भर्तियों की लिखित परीक्षा की तारीखें तक तय हो चुकी थीं, लेकिन प्रस्तावित नए आयोग से पूरी प्रक्रिया ठप है।

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक कालेजों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी), प्रवक्ता (पीजीटी) और प्रधानाचार्य का चयन माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र करता है। चयन बोर्ड में लंबे समय बाद वर्ष 2013 की भर्तियां किसी तरह पूरी हो सकी हैं। वर्ष 2011 की लिखित परीक्षा के परिणाम और इंटरव्यू पहले से ही लंबित हैं। चयन बोर्ड ने कुछ माह पहले वर्ष 2016 की लिखित परीक्षा कराने का एलान किया। परीक्षा अक्टूबर माह के चारों रविवार यानी 8, 15, 22 व 29 को होनी थी। टीजीटी-पीजीटी 2016 के नौ हजार से अधिक पदों के लिए करीब पौने ग्यारह लाख अभ्यर्थी दावेदार हैं, जो इन दिनों परीक्षा की तैयारियों में जुटे थे। इसी बीच प्रदेश की भाजपा सरकार ने सूबे के अशासकीय महाविद्यालय व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के चयन के लिए नए आयोग के गठन का प्रस्ताव किया है।

नया आयोग माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र और उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग उप्र का विलय करके बनना है। शासन ने नए आयोग को ड्राफ्ट कमेटी और उसकी मॉनीटरिंग की अलग कमेटी गठित की हैं। दोनों की बैठकें भी हो चुकी हैं, साथ ही नए आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की अर्हता तक लगभग तय है, लेकिन गठन प्रक्रिया इसके आगे नहीं बढ़ी है। शासन के इस कदम के बाद दोनों आयोगों के अध्यक्ष व सदस्य अपना त्यागपत्र भी सौंप चुके हैं। भर्तियां ठप होने से अभ्यर्थी परेशान हैं और बेमियादी आंदोलन की रणनीति बन रही है।

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