मॉडल नहीं बन सके सरकारी स्कूल

नई दिल्ली : दिल्ली की सत्ता हासिल करने के ठीक एक वर्ष बाद फरवरी 2016 में उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने छह महीने के भीतर राजधानी के 54 सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल के तौर पर विकसित करने का एलान किया था। इस एलान के कुछ दिनों बाद कवायद शुरू भी हुई, लेकिन पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र के कुछ स्कूल व प्रेसीडेंट एस्टेट के एक स्कूल को मिलाकर कुल 1029 सरकारी स्कूलों में से 10 स्कूलों में बेंच व डेस्क बदलने के अलावा कुछ नहीं हुआ। जबकि सरकार ने पहले चरण में 54 स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने के बाद अगले चरण में अन्य सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर मॉडल स्कूल बनाने का दावा किया था।

यहां मॉडल स्कूल से मतलब स्कूल परिसर से लेकर कक्षाओं तक सब कुछ उच्च श्रेणी का हो। स्कूल के प्रधानाचार्य, शिक्षक व अन्य कर्मचारी अनुशासन का खास ख्याल रखने, छात्रों की हर परेशानी को दूर करने तथा उन्हें गुणवत्ता परक शिक्षा देने से संबंधित है। इसके लिए दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण लेने के लिए विदेश भेजा था। हालांकि प्रधानाचार्य व शिक्षकों को विदेश भेजने का आदेश भी सवालों के घेरे में आ गया, क्योंकि इसकी अनुमति उपराज्यपाल से नहीं ली गई थी। फिलहाल इस मामले की जांच चल रही है और शिक्षा निदेशालय ने आगे से शिक्षकों को बाहर प्रशिक्षण के लिए भेजना बंद कर दिया। जिन स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाना तय हुआ था, उनमें से 30 स्कूलों के विकास कार्य की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग को दी गई थी।

दिल्ली सरकार ने यह भी दावा किया था कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा लेकिन संबंधित विभाग के अधिकारियों ने यह कहकर विकास कार्य को मंजूरी नहीं दी कि स्कूलों का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के जिम्मे है। मालूम हो कि सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल में तब्दील करने की इस योजना को मूर्त रूप देने से पहले उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने सभी सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के साथ त्यागराज स्टेडियम में एक बैठक की थी और सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर आधुनिक रूप देने का सुझाव मांगा था। साथ ही सभी प्रधानाचार्यों को स्कूल के विकास हेतु विजन डाक्यूमेंट तैयार करने को कहा था।

मॉडल स्कूल बनाने में आई कई अड़चनें

दिल्ली टूरिज्म एंड टांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (डीटीटीडीसी) ने जब सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित करने का काम शुरू किया तो निर्माण कार्य के लिए कुछ स्कूलों में पेड़ काटने की जरूरत हुई। इसके लिए पर्यावरण विभाग से मंजूरी नहीं मिली। कुछ स्कूलों में छात्रों व शिक्षकों के अनुपात को ठीक करने में सीबीएसई के मानकों का पालन हीं हो सका। प्रत्येक स्कूल में एक कंप्यूटर लैब और एक कंप्यूटर एक्सपर्ट रखे जाने की योजना थी। लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने में ही योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसके अलावा मेडिकल सुविधा के लिए मेडिकल रूम, दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष सुविधाओं को सभी स्कूलों में नहीं उपलब्ध कराया जा सका।

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