अनुदेशकों को मातृत्व अवकाश

प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत अंशकालिक महिला अनुदेशकों और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में संविदा पर कार्यरत शिक्षिकाओं या महिलाकर्मियों को तीन महीने का बगैर मानदेय मातृत्व अवकाश मिलेगा। अवकाश दो बच्चों के लिए ही मिलेगा।हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक याचिका की सुनवाई के बाद संविदा पर कार्यरत शिक्षिकाओं और अंशकालिक अनुदेशकों को मातृत्व अवकाश दिए जाने के संबंध में निर्णय लेने का निर्देश प्रदेश सरकार को 20 फरवरी 2017 को दिया था।

इसके बाद यह प्रकरण सर्व शिक्षा अभियान के शिक्षा परियोजना परिषद की कार्यकारिणी समिति में रखा गया। नौ मार्च को आयोजित समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि आरटीई-09 के अंतर्गत 100 से अधिक छात्र संख्या वाले परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में संविदा पर कार्यरत महिला अनुदेशकों और कस्तूरबा की शिक्षिकाओं व कर्मियों को प्रथम दो बच्चों के लिए तीन महीने का बिना मानदेय मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए।शिक्षा परियोजना परिषद की नौ मार्च की बैठक में लिये गए निर्णय पर मुहर लगाते हुए प्रदेश सरकार ने चार मई को शासनादेश जारी कर दिया। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक डॉ. वेदपति मिश्र ने 29 मई को सभी बेसिक शिक्षाधिकारियों को पत्र लिखकर तीन महीने का बिना मानदेय मातृत्व अवकाश देने के निर्देश दिए हैं।

बिना मानदेय मातृत्व अवकाश के आदेश पर घमासान संविदा पर कार्यरत अनुदेशकों व शिक्षिकाओं को बिना मानदेय तीन महीने का मातृत्व अवकाश दिए जाने के आदेश को लेकर घमासान मचा है। दरअसल, नियमित शिक्षिकाओं को वेतन के साथ छह महीने का मातृत्व अवकाश दिया जाता है। नियमित शिक्षिकाओं से एक चौथाई से भी कम वेतन पाने वाली अनुदेशकों को अवकाश उनसे आधा मिलेगा और वेतन से भी हाथ धोना पड़ रहा है। इसे लेकर आक्रोश है।

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