माध्यमिक कॉलेजों को नहीं मिल सकेंगी किताबें

माध्यमिक कालेजों के करोड़ों छात्र-छात्रओं को इस बार किताबें मुहैया होने के आसार नहीं हैं। किताबों के मूल्य को लेकर शिक्षा विभाग के अफसर व प्रकाशकों में एक राय नहीं बन पाई है। देश भर के 14 में से 12 प्रकाशकों ने तय किये गए विक्रय मूल्य पर किताबें उपलब्ध कराने से इन्कार किया है। उनका कहना है कि सरकार ने विक्रय मूल्य में मामूली वृद्धि की है, जबकि किताबों का लागत मूल्य कई गुना बढ़ गया है। साथ ही कागज की गुणवत्ता भी बदल दी गई है। ऐसे में कालेजों में पढ़ाई प्रभावित होना तय है। Madhyamik school Book

माध्यमिक विद्यालयों के लिए किताबों का प्रबंध माध्यमिक शिक्षा परिषद करता है। बोर्ड के अफसर पिछले वर्ष तक कुछ विषयों की किताबें प्रकाशित करने के लिए प्रकाशकों का चयन करते रहे हैं। इस बार अलग रुख अपनाते हुए बोर्ड ने किताबें मुहैया कराने का जिम्मा खुले बाजार को सौंपा। पहली जुलाई से शुरू हुए शैक्षिक सत्र 2017-18 में कक्षा नौ से लेकर 12 तक की किताबों को परिषद के नियंत्रण से मुक्त करने का आदेश जारी किया गया। इसके लिए प्रकाशकों से तय गुणवत्ता पर अंडरटेकिंग 21 जून तक मांगी गई, ताकि उन्हें पुस्तक प्रकाशन की अनुमति दी जाए।

देश भर के 14 प्रकाशकों ने 100 रुपये के स्टैंप पर यह लिखकर दिया कि वे पुस्तकों के भीतरी पृष्ठों में निर्धारित स्पेसिफिकेशन के कागज 60 जीएसएम वर्जिन पल्प नान रिसाइकिल्ड वाटर मार्क ‘ए’ श्रेणी के मिलों तथा कवर पृष्ठ में 175 जीएसएम के कागज का प्रयोग करेंगे। शासन ने ऐसा न करने वाले प्रकाशक को ब्लैक लिस्टेड करते हुए कठोर कार्रवाई का भी प्रावधान किया है। यहां तक सब कुछ दुरुस्त रहा। प्रकाशकों को यह उम्मीद थी कि सरकार तय शर्तो के अनुरूप विक्रय मूल्य में भी इजाफा करेगी।

यूपी बोर्ड ने मंगलवार को सभी प्रकाशकों की बैठक बुलाकर उन्हें नई दरें और नियम बताए। इसमें शिक्षा निदेशक अमरनाथ वर्मा ने विक्रय मूल्य बताया जिसमें मामूली वृद्धि हुई थी, जबकि किताबों के प्रकाशन में लागत कई गुना बढ़ चुकी है। 14 में से 12 प्रकाशकों ने विरोध करते हुए, पुस्तकें प्रकाशित करने से इन्कार किया है। शिक्षा निदेशक ने कहा कि जो प्रकाशक नये विक्रय मूल्य से सहमत नहीं वह अपनी दावा वापस ले सकते हैं।

आगरा के प्रकाशक अतुल जैन व अजय रस्तोगी ने बताया कि इलाहाबाद व पटना के एक-एक प्रकाशक को छोड़कर सभी ने दावेदारी वापस लेने का एलान किया है, क्योंकि किताबों के कागज का मूल्य पिछले साल से 20 से 30 प्रतिशत बढ़ गया है और जीएसटी लागू होने के बाद उसमें और बढ़ोतरी होनी है। ऐसे में किताबें प्रकाशित कर पाना संभव नहीं है। उधर, की सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि बैठक में प्रकाशकों को नई दरों की जानकारी दी गई, कुछ ने विरोध किया, लेकिन किताबों के प्रकाशन पर संकट नहीं है।

किताबों का पूर्व विक्रय मूल्य
प्रति आठ पेज                    92 पैसे
कवर                                80 पैसे
कागज की गुणवत्ता           बी श्रेणी

अब बदला विक्रय मूल्य
प्रति आठ पेज                    1.05 रुपये
कवर                                 84 पैसे
कागज की गुणवत्ता –          ए श्रेणी
(नोट : एक साल में कागज का मूल्य बढ़ चुका व जीएसटी से लागत बढ़ने की उम्मीद है। )

जुलाई में बैठक पर सवाल नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है और शासन ने अब किताबों का मूल्य तय किया गया है। ऐसे में प्रकाशन समय पर होना संभव ही नहीं है। सारे प्रकाशक एक साथ कार्य करते तब भी दो माह में किताबें मुहैया करा पाना आसान नहीं था।

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