प्रदेश में भर्तियों की लंबी सूची, चयन प्रक्रिया धीमी

प्रयागराज : दस माह में प्रवक्ता व स्नातक शिक्षक भर्ती 2011 के सारे विषयों के लिखित परीक्षा के परिणाम और साक्षात्कार नहीं हो सके हैं। जिन विषयों के इंटरव्यू कई माह पहले हुए उसके रिजल्ट का अब तक इंतजार है। इसके बाद भी माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र को नई-नई भर्तियों का जिम्मा सौंपा जा रहा है। चंद दिन पहले हाईकोर्ट ने चयन की जिम्मदारी सौंप दी है, जिसे समय पर पूरा कराना चयन बोर्ड के लिए बड़ी चुनौती है।

प्रदेश के चार हजार से अधिक अशासकीय माध्यमिक कालेजों में से अधिकांश में नियमित प्रधानाचार्य नहीं हैं, क्योंकि अब तक वर्ष 2011 प्रधानाचार्य चयन का परिणाम जारी हुआ है और न ही 2013 विज्ञापन का साक्षात्कार शुरू कराया जा सका है। इस मामले में हाईकोर्ट कई बार नाराजगी भी जता चुका है, साथ ही 2011 का रिजल्ट देने का रास्ता भी अब साफ है, फिर भी टालमटोल जारी है।

हालत यह है कि 2016 प्रवक्ता व स्नातक शिक्षक परीक्षा लंबे समय बाद अब कराने का मुहूर्त तय हो सका है। इसके बाद भी हाईकोर्ट ने प्रदेश भर से जूनियर हाईस्कूल से उच्चीकृत सहायता प्राप्त कालेजों में शिक्षक चयन का दायित्व चयन बोर्ड को सौंप दिया है। निर्देश है कि खाली पदों का ब्योरा जिलों से 15 फरवरी तक लेकर 15 जून तक उन्हें भरा जाए, ताकि एक जुलाई से उन कालेजों में पठन-पाठन हो सके। चयन बोर्ड को प्रदेश के संस्कृत कालेजों में प्रधानाचार्य व शिक्षक चयन का दायित्व कई माह पहले दिया जा चुका है शिक्षा निदेशालय ने संस्कृत कालेजों में रिक्त पदों का ब्योरा भी मंगा लिया है।

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