शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर एलजी ने लगाई रोक – नई दिल्ली

नई दिल्ली : राजधानी के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर उपराज्यपाल अनिल बैजल ने रोक लगा दी है। उपराज्यपाल की ओर से दिल्ली अधीनस्थ चयन सेवा बोर्ड (डीएसएसएसबी) को दिए गए आदेश के बाद बोर्ड ने बृहस्पतिवार को भर्ती प्रक्रिया रोक दी है। खास बात यह है कि उपराज्यपाल के इस आदेश के बाद हुई कार्रवाई की जानकारी खुद मनीष सिसोदिया ने दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया में अतिथि शिक्षकों को इंसाफ मिलेगा। शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में दिल्ली सरकार का कहना था कि अतिथि शिक्षकों को आयु में छूट मिलने के साथ-साथ अनुभव को भी तरजीह मिलनी चाहिए। करीन 15 दिन पहले डीएसएसएसबी ने 14,820 शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। इच्छुक अभ्यर्थियों को 25 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन करना था। इस भर्ती में दिल्ली सरकार के स्कूलों में अनुबंध या अतिथि शिक्षकों के अलावा सर्व शिक्षा अभियान के तहत काम करने वालों को उम्र सीमा में छूट का भी प्रावधान था। लेकिन अनुबंध पर काम करने वाले शिक्षकों के अनुभव को वरीयता नहीं दी गई थी। इस पर दिल्ली सरकार को एतराज था। सरकार का कहना था कि अतिथि शिक्षकों को उम्र में छूट देने के साथ उनके अनुभव को भी वरीयता देनी चाहिए।

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पिछले दिनों यह मामला दिल्ली विधानसभा के मानसून सत्र में भी उठा था। इस पर शिक्षा मंत्री सिसोदिया का कहना था कि शिक्षकों की भर्ती के लिए डीएसएसएसबी ने जो विज्ञापन निकाला है, वह शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली सरकार की तरफ से हो रहे कामों को पटरी से उतारने की साजिश है। इस बाबत विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पारित किया गया था। इसके बाद शिक्षा निदेशालय ने डीएसएसएसबी को एक पत्र भी लिखा। 1अतिथि शिक्षकों ने किया स्वागत: डीएसएसएसबी द्वारा शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत निकाली गई शिक्षक भर्ती पर अगले आदेश तक रोक लगाने का अतिथि शिक्षकों ने स्वागत किया है। इनका कहना है कि स्थायी भर्ती में सिर्फ उनके अनुभव को वेटेज देने से कुछ अतिथि शिक्षकों को ही फायदा होगा क्योंकि शिक्षक भर्ती में पद काफी कम हैं।

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नई दिल्ली : नए शिक्षकों की भर्ती पर रोक लगाने के फैसले का भाजपा ने स्वागत किया है। उसका कहना है कि अतिथि शिक्षकों के हितों को नजरअंदाज करके नए शिक्षकों की भर्ती की जा रही थी। हमारे विरोध के कारण दिल्ली सरकार को आखिरकार यह फैसला वापस लेना पड़ा। दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी का कहना है कि अतिथि शिक्षकों ने अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय सरकारी स्कूलों को दिया है। इस कारण नियमित शिक्षकों की नियुक्ति में उनका पहला अधिकार है।

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इसे नजरअंदाज कर कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति की घोषणा की गई। इसलिए भाजपा ने उपराज्यपाल और दिल्ली के मुख्यमंत्री के समक्ष विरोध दर्ज कराया था। भाजपा का कहना है कि पिछले सप्ताह अतिथि शिक्षकों ने तिवारी से मुलाकात कर उनसे समर्थन मांगा था। इसके बाद उन्होंने दिल्ली सरकार से अतिथि शिक्षकों के लिए कोटा निर्धारित करने की अपील की थी। साथ ही उपराज्यपाल अनिल बैजल से भी बात की गई थी। अब शिक्षकों की भर्ती रोकने का आदेश जारी कर दिया गया है। इससे अतिथि शिक्षकों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।अतिथि शिक्षकों को नियमित करे सरकार: मनोज तिवारी

 

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