परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी से शिक्षा चौपट

ग्रेटर नोएडा – जिले की परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से शासन द्वारा अनेक प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या न होने से शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है। इससे सीधे तौर विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। शिक्षा विभाग द्वारा सीधे तौर पर नजरअंदाज किया जा रहा है। बच्चों को मध्यान्ह भोजन, यूनिफॉर्म, किताब से लेकर अनेक सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन सीधे तौर पर शिक्षा से जुड़े मुद्दे को शासन व जिला शिक्षा विभाग द्वारा दरकिनार किया जाता रहा है। बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए शिक्षक जिम्मेदार होते हैं और जिले की परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों का अनुपात बेमेल है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के मुताबिक प्राथमिक विद्यालय में 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 35 विद्यार्थियों पर एक शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन जिले की परिषदीय विद्यालयों के साथ ऐसे किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। आलम यह है कि ग्रामीण इलाके के कई विद्यालय ऐसे हैं जहां एक भी सहायक अध्यापक नहीं है। शिक्षा विभाग की इस लापरवाही की वजह से विद्यार्थियों का भविष्य चौपट हो रहा है।

शिक्षा विभाग की मदद से चलता है मनामानी नियुक्ति का खेल : शहरी क्षेत्र के स्कूल शिक्षकों की पहली पसंद हैं। शिक्षा विभाग से साठ-गांठ कर शिक्षक शहरी इलाके के स्कूलों में मनमानी नियुक्ति प्राप्त कर लेते हैं। अगर आंकड़े पर नजर डालें तो मौजूदा स्थिति यह है कि बिसरख विकासखंड के स्कूलो में सबसे ज्यादा शिक्षक मौजूद हैं। यहां के स्कूलों में कम छात्र संख्या होने के बावजूद शिक्षक वर्षों से डटे हुए हैं। वहीं जेवर व दनकौर के ग्रामीण इलाके के कई स्कूल ऐसे हैं जहां ज्यादा विद्यार्थी हैं, लेकिन शिक्षक न होने से पठन पाठन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई विद्यालय तो ऐसे हैं जो एकल शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं।

पूर्व अधिकारियों की मनमानी का खामियाजा भुगत रहे विद्यार्थी : शिक्षकों व विद्यार्थियों का बेमेल अनुपात शिक्षा विभाग के पूर्व अधिकारियों की देन है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारियों के कार्यकाल में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर घोर अनियमितता बरती गई और पैसे लेकर शिक्षकों को मनमानी नियुक्ति दी गई। शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की करनी का खामियाजा उन नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा है, जो बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए परिषदीय स्कूलों में जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.