दिसंबर आ गया लेकिन बच्चों को अब तक नहीं मिले स्वेटर

लखनऊ : Uttar Pradesh के prathmik vidyalaya में पढ़ने वाले 1.53 लाख बच्चों को ठंड से बचाने के लिए स्वेटर बांटने की योजना खुद ठिठुर गई है। दावा नवंबर में बच्चों को स्वेटर बांटने का था, लेकिन दिसंबर का एक सप्ताह बीतने के बाद भी टेंडर तक पूरा नहीं हो सका है। मंत्री-अफसर दिसंबर में स्वेटर बांटने का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन इस दावे की जमीन भी खोखली ही नजर आ रही है। prathmik vidyalaya में पढ़ने वाले बच्चों को दो जोड़ी Uniforms, School Bags & Books पहले से मिलती हैं। योगी सरकार ने इसके साथ जूता-मोजा और स्वेटर भी उपलब्ध करवाने का फैसला किया था, जिससे बच्चे ठंड में परेशान न हों। इसकी घोषणा जुलाई में ही हो गई थी, लेकिन स्वेटर खरीद की प्रशासकीय और वित्तीय अनुमति में ही तीन महीने लग गए। 3 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में स्वेटर और जूता-मोजा खरीद को मंजूरी मिली। इसमें दावा किया गया कि नवंबर में स्वेटर वितरण हो जाएगा। टेंडर होने के बाद जूते-मोजे बंटने भी लगे, लेकिन स्वेटर खरीद अटकी है।

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जेम पोर्टल के कारण फंसा पेच : विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकार ने तय किया गवर्नमेंट ई-मार्केट (जेम) पोर्टल के जरिए स्वेटरों की खरीद की जाएगी। इसके लिए अक्टूबर के आखिर में प्रक्रिया शुरू हुई। 1.53 करोड़ स्वेटर एक साथ उपलब्ध करवाने में पोर्टल पर पंजीकृत फर्मों ने हाथ खड़े करने शुरू कर दिए। इसी बीच निकाय चुनाव की आचार संहिता भी लागू हो गई। राज्य निर्वाचन आयोग ने आचार संहिता का हवाला देकर टेंडर रोक दिया। करीब एक सप्ताह विभाग को आयोग से इसकी अनुमति लेने में लग गए। प्रक्रिया दुबारा शुरू हुई, लेकिन फर्म का इंतजार अब भी जारी है। इसमें पेच स्वेटर के मूल्य को लेकर पड़ रहा है। सरकार ने करीब 260 करोड़ रुपये का बजट इसके लिए रखा है। ऐसे में प्रति स्वेटर 170 रुपये का बजट है जबकि कई जिलों में फर्मों ने अधिक रेट कोट कर रखा है।

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अब ‘दोहरी’ खरीद का रास्ता : लंबी कवायद के बाद अब रास्ता यह निकाला गया है कि जैम पोर्टल के जरिए जितने स्वेटर उपलब्ध हो सकें, मंगवा लिए जाएं और बाकी के लिए शॉर्ट टर्म टेंडर निकालकर फर्में तय की जाएं। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में एक पखवारे से कम नहीं लगेगा और जब तक वितरण शुरू होगा, ठंड बीतने के कगार पर पहुंच चुकी होगी। इस समय भी सुबह पारा 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच रहा है। बीआरडी अस्पताल, महानगर के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ़ मनीष शुक्ला का कहना है कि यह मौसम सबसे ज्यादा बचाव का है। क्योंकि दिन में पारा बढ़ जाता है और रात व सुबह तापमान कम होता है। ऐसे में लापरवाही होने पर निमोनिया, खांसी-जुकाम बुखार समेत कई बीमारियां चपेट में ले सकती हैं। इनपुट : सैयद अब्बास रिजवी  एनबीटी ब्यूरो,

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अनुपमा जायसवाल (बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार)

नवंबर में बच्चों को स्वेटर क्यों नहीं वितरित किए जा सके
स्वेटर की खरीद केंद्र सरकार के जेम पोर्टल से होनी थी। इसके चलते विलंब हुआ।

ठंड शुरू हो चुकी है। ऐसे में वितरण न होने से योजना तो फेल हो गई/
मैं खुद इसको लेकर प्रयासरत हूं। जल्द खरीद व वितरण प्रक्रिया पूरी करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

दिसंबर का एक हफ्ता बीत गया, फर्म तय नहीं है तो दिसंबर में वितरण कैसे हो पाएगा/
हम सभी उपायों पर काम कर रहे हैं। जल्द प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और सघन अभियान चलाकर स्वेटर बांटे जाएंगे।

December came but the kids did not even get the sweaterDecember came but the kids did not even get the sweater

 

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