खंड शिक्षा अधिकारियों की छह साल में भी नहीं बनी सेवा नियमावली

शासन ने पद व विभाग ने काम तय कर दिया है लेकिन, उनकी सेवा शर्ते, नियुक्ति और तबादला कौन करेगा, यह तय नहीं हो पा रहा है। सूबे में राजपत्रित अधिकारी की सेवा नियमावली छह साल में नहीं बन पाई है, वहीं उनके मातहत शिक्षकों की UP Primary Teacher Transfer Policy विभाग जारी करने की तैयारी में है। हम बात कर रहे हैं खंड शिक्षा अधिकारी की। इस काडर विशेष की अनदेखी से प्रदेश में रिक्त पदों की संख्या बढ़ती जा रही है।

ब्लाक स्तर पर प्राथमिक शिक्षा की जवाबदेही खंड शिक्षा अधिकारियों पर है। विद्यालयों में पठन-पाठन से लेकर संसाधन मुहैया कराने व शिक्षकों की उपस्थिति का जिम्मा उसी पर है। पहले यह पद प्रति उप विद्यालय निरीक्षक यानी एसडीआइ के नाम से जाना जाता रहा है। जुलाई 2011 में इसका काडर रिव्यू हुआ और उप विद्यालय निरीक्षक यानी डीआइ और प्रति उप विद्यालय निरीक्षक यानी एसडीआइ के संवर्गो को मिलाकर खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पदनाम का नया संवर्ग बनाया गया।

पदनाम बढ़ने पर बीईओ का ग्रेड वेतन भी 2800 से बढ़ाकर 4800 रुपये हुआ। इस बदलाव पर यह कहा गया कि बीईओ प्राथमिक व Upper Primary School के शिक्षक व प्रधानाध्यापकों को निर्देशित करते हैं, तब उनका वेतन शिक्षकों से कम नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्हें राजपत्रित अधिकारी का दर्जा भी दिया गया। ताज्जुब यह है कि राजपत्रित अधिकारी का दर्जा मिलने के बाद भी अब तक उनकी सेवा नियमावली नहीं बन सकी है। काडर विशेष के प्रति अनदेखी का असर भी दिख रहा है। प्रदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों के 1031 पद हैं उनमें से मात्र 765 बीईओ विभिन्न ब्लाकों में तैनात हैं, 272 खाली पड़े हैं। उन ब्लाकों का जिम्मा पड़ोसी बीईओ को अतिरिक्त प्रभार के रूप में सौंपा गया है।

 बीएसए की अगुवाई का विरोध: जिले में basic shiksha adhikari बीईओ को ब्लाक में इधर से उधर करते रहे हैं। काडर बदलने के बाद से यह संवर्ग इसका विरोध कर रहा है। इस संबंध में कई बार अलग-अलग आदेश तक जारी हुए। हालांकि विभागीय अफसरों ने जिले की व्यवस्था बनाये रखने के लिए बीएसए को ही जिले में फेरबदल करने का आदेश दिया है।

पढ़ें- Basic Shiksha Vibhag Inter District Teachers Transfer

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