बिना प्रशिक्षण दिए योग कराने का फरमान

सरकार बदलने के साथ साथ उनका काम करने का तरीका भी बदल जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में योग क्लास लगाने का आदेश दिया है। योग क्लास लगाने के लिए योग का प्रशिक्षण जरुरी होना चाहिए मगर ऐसा नहीं है जिंतने भी विकास खंड स्तर स्कूल है उन स्कूलों में जो शिक्षक योग सीखा रहे है उन शिक्षकों को योग का कोई प्रशिक्षण नहीं मिला और सरकार ने प्रदेश भर के स्कूलों को योग करने का आदेश जारी कर दिया है। योग करने की प्रक्रिया तीन महीने पहले जनवरी में शुरू हुई थी लेकिन अधिकांशतः यह जिला स्तर आगे नहीं बढ़ पाई और बेसिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी ने भी इस योजना से संबधित कोई तेज़ी नहीं दिखाई और अपनी गलती छुपाने के लिए योग करने का दबाब अब विद्यालयों पर बनाया जा रहा है। यह दबाब सरकार को खुश करने के लिए बनाया जा रहा है।

बेसिक शिक्षा परिषद प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए बेसिक शिक्षा परिषद ने समय सारिणी जारी की है। प्रदेश के लगभग एक लाख से अधिक प्राथमिक व करीब 50 हजार उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रार्थना के बाद योग करने का आदेश जारी कर दिया गया है और इस फरमान को जारी करने से पहले अफसरों ने विद्यालय स्तर पर किसी भी जमीनी हकीकत की पड़ताल नहीं कि विद्यालय के शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण ही नहीं मिला है। असल बेसिक शिक्षा परिषद  प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण देने का खाका छह जुलाई 2016 को ही खींचा गया था।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद उप्र यानी एससीईआरटी के निदेशक ने आदेश के पांच माह बाद पांच जनवरी को प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी किया। इस कार्यक्रम से सभी जिलों से दो-दो जिला स्तरीय टीम को प्रशिक्षित किया जाना था और इसके लिये 11 से 13, 16 से 18 और 19 से 21 जनवरी तक का कार्यक्रम जारी हुआ। यह प्रशिक्षण परिषद कार्यालय लखनऊ में दिया गया। एससीईआरटी ने प्रदेश के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट के जरिये दो-दो संदर्भ दाताओं को योग प्रशिक्षित करके भेजा और उन्हें अपने जिले के डायट में दूसरे शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण देना था और इसी प्रकार पहले बीआरसी स्तर पर और फिर उसी क्रम में आगे शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण दिया जाना था। प्रदेश के कुछ जिलों को छोड़कर योग का प्रशिक्षण डायट स्तर से आगे नहीं बढ़ सका और इस योग कार्यक्रम को आगे न बढ़ाने को कहा गया कि प्राथमिक स्कूलों में शारीरिक शिक्षक नहीं होते हैं और  वहां पर चालीस वर्ष से कम आयु के शिक्षकों को योगा का प्रशिक्षण दिया जाए। और एससीईआरटी ने इस योग कार्यक्रम के संबंध में डायट प्राचार्य व जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को समान रूप से निर्देश दिये थे लेकिन डायट और बीएसए ने यह काम एक-दूसरे का मानकर ठीक से मानीटरिंग ही नहीं किया। इस कारण से न  तो शिक्षकों ने रुचि दिखाई और प्रशिक्षण दाताओं ने ही ब्लाक स्तर पर जाकर योग सिखाया और जब से बेसिक परिषद सचिव संजय सिन्हा का आदेश आने के बाद अब स्कूलों में हड़कंप मच गया है अब योग के नाम पर अब स्कूलों में खानापूरी हो रही है।

अब हर जिले में मास्टर ट्रेनर सिखाएंगे योग

प्रदेश के सभी जिलों और स्कूलों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिये तैयारियां जल्द हीबहुत तेज हो जाएंगी। 21 जून को लखनऊ में योग दिवस के मौके पर योग प्रदर्शन का कार्यक्रम किया जा रहा है इस कार्यक्रम में हर जिले से 200 छात्र-छात्रओं के पहुंचने का लक्ष्य तय किया गया है और प्रसाशन ने योग से सम्बंधित सभी सीडी व मास्टर ट्रेनर का भी प्रबंध किया जा रहा है ताकि जो छात्र योग प्रदर्शन का अपना कार्यक्रम प्रदर्शन करेंगे तो इन सीडी के द्वारा विधिवत अभ्यास पहले कर सके।

अब योग देश ही नहीं दुनिया के अनेक देशो में 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है। और इस बार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में योग दिवस के मौके पर एक विशेष कार्क्रम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें प्रदेश से आये हज़ारों छात्र छात्र इसमें भाग लेंगे और अपने योग का प्रदर्शन करेंगे और अफसरों का दावा है कि इस कर्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भाग ले सकते है। इस योग प्रदर्शन कार्यक्रम में करीब 50 हजार लोगों के भाग करने का लक्ष्य रखा गया है।

अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन  सभी जिलों को  इस संबंध में निर्देश जारी कर दिये है आदेश में कहा गया है कि यह कार्यक्रम करीब एक घंटे चलेगा  इस संबंध में सीडी व मास्टर ट्रेनर का प्रबंध किया जाएगा। इस कर्यक्रम में भाग लेने वाले 15 से 25 वर्ष तक के 200 छात्र-छात्रओं व नागरिकों को चिह्न्ति करने का निर्देश दिया गया है। इस कर्यक्रम का आयोजन सुबह सात से आठ बजे के बीच होग शासन ने उन सभी के नाम, पदनाम व मोबाइल नंबर भी मांगा है। यह भी निर्देश दिया गया है कि जिन छात्र-छात्रओं और नागरिकों को आयोजन में प्रतिभाग करना है उनका चिह्नंकन जल्द किया जाए, ताकि समय रहते उन्हें प्रशिक्षित भी कर दिया जाए।

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