हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापकों को बीएलओ नियुक्ति पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी

इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापकों को बीएलओ नियुक्त करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई सात फरवरी तक अध्यापकों के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्यवाही पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने राष्ट्रीय शिक्षक महासंघ उप्र झांसी की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 के तहत अध्यापकों को गैर शैक्षिक कार्य पर नहीं लगाया जा सकता। हाईकोर्ट के कई निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अध्यापकों को बीएलओ का काम देना कानून और कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है। कोर्ट ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को विचारणीय माना और सरकार को इस संबंध में जानकारी देने का निर्देश दिया है।

नियमित जांच के बिना अस्थायी कर्मी की बर्खास्तगी अवैध1इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर में सैनिक कल्याण और पुनर्वास विभाग के कल्याणकर्ता आरएस त्यागी की बर्खास्तगी रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याची सेवानिवृत्त हो चुका है, ऐसे में उसे तीन माह में सेवानिवृत्त परिलाभों का भुगतान किया जाए। यह फैसला देते हुए हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अस्थायी कर्मचारी के पीठ पीछे जांच के आधार पर सेवा बर्खास्तगी दंडात्मक होने के नाते गलत है। बर्खास्त करने से पहले नियमित विभागीय जांच किया जाना जरूरी है।

कोर्ट ने कहा कि बर्खास्तगी का ठोस आधार जरूरी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने आरएस त्यागी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बहस की। याची 10 जनवरी 1986 में अस्थायी रूप से नियुक्त हुआ। 1दो साल की परिवीक्षा अवधि पूरी करने के बाद वह अस्थायी कर्मी के रूप में कार्यरत रहा। बिना नियमित जांच किए 17 दिसंबर 1992 को उसे बर्खास्त कर दिया गया। याची पर आरोप है कि उसने दो अन्य सहकर्मियों के साथ मिलकर सार्वजनिक लकड़ी बेच दी। दोनों सहकर्मी स्थायी थे।

 

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