बेसिक स्कूलों को मान्यता देने में हो रही आनाकानी

हर बच्चे को पढ़ने के अधिकार पर विभागीय अधिकारी ही सबसे बड़ा रोड़ा बने हैं। विभिन्न जिलों में हर साल बड़ी संख्या में नर्सरी, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय खुल रहे हैं उनमें से तमाम ने नवीन मान्यता पाने का आवेदन किया है, लेकिन अफसर मान्यता देने में आनाकानी कर रहे हैं। इस कदम से जिलों में बिना मान्यता के चलने वाले स्कूलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बेसिक शिक्षा सचिव ने सभी जिलों से अब मान्यता के लंबित प्रकरणों की सूची तलब की है। साथ ही 20 मई तक उनका निपटारा करने का आदेश दिया गया है।

प्रदेश में नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 लागू है। इसके बाद शासन ने इस संबंध में 2011 व 2013 में आदेश जारी किया है कि नर्सरी, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों को अंग्रेजी या फिर हंिदूी माध्यम से संचालित करने की मान्यता दी जाए। स्पष्ट आदेश के बाद भी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक और zila basic shiksha adhikari office में मान्यता के तमाम प्रकरण लंबित चल रहे हैं। अफसर व उनका स्टॉफ मान्यता की फाइलों में आये दिन नई-नई सूचना देने की टिप्पणी लगाकर स्कूल संचालकों को दौड़ाया जा रहा है। यही नहीं जिनकी पत्रवली पूर्ण हो चुकी है उन्हें भी मान्यता का पत्र निर्गत करने में आनाकानी की जा रही है। मान्यता के प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण न होने की शिकायतें अब शासन व सरकार तक पहुंच रही हैं। अब बेसिक शिक्षा सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक व बीएसए को निर्देश दिया है कि शासनादेश व विभागीय निर्देशों के अनुरूप मंडल व जिला स्तर पर नवीन मान्यता के लंबित प्रकरण हर हाल में 20 मई तक पूर्ण कर लिये जाएं। उन्होंने सभी जिलों में इस संबंध में प्रोफार्मा भेजकर सूचनाएं भी मांगी है। इसमें पूछा गया है कि एक मार्च 2017 तक यानी वर्ष 2016-17 के कितने लंबित प्रकरण हैं। उनमें से अब तक कितने प्रकरण निस्तारित हुए और अवशेष प्रकरणों की संख्या कितनी है।

पढ़ें- यूपी बोर्ड में बदलाव सरकार के जिम्मे

Basic Shiksha News पढ़ने के लिए आप primarykateacher ब्लॉग को सब्सक्राइब कर सकते है। जिससे आपको हमारे ब्लॉग की लेटेस्ट पोस्ट का नोटिफिकेशन मिल सके। साथ ही इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि और लोग भी इस पोस्ट का फायदा उठा सकें।

6 Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.