स्कूल के गेट पर ही होगी शिक्षक की पहचान, शिक्षकों के दूसरे स्कूल में जाने की शिकायतों पर की छुट्टियों में लगाए जाएंगे बोर्ड, मोबाइल नंबर भी लिखे जाएंगे

अलीगढ़ : आपका बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ता है तो उसका शिक्षक कौन है, इसकी जानकारी स्कूल के गेट पर ही हो जाएगी। शिक्षक का फोटो, नाम व मोबाइल नंबर गेट पर लगे बोर्ड पर होगा। इससे आप यह भी चेक कर सकेंगे कि बच्चों को पढ़ा रहा शिक्षक स्कूल का ही है या कोई और है ?

दरअसल शिक्षकों का अपनी मनमानी से निकट के स्कूल में आने की शिकायतें विभाग को मिलती रही हैं, इसके चलते सरकार ने लागू कर दी है। इसके तहत जिले भर के कुल 25 सौ स्कूलों के गेट पर उनमें तैनात आठ हजार शिक्षकों की फोटो लगाने की तैयारी की जा रही है। यह काम गर्मी की छुट्टियों में पूरा किया जाना है। यह काम कक्षा एक से आठ के सरकारी स्कूलों में होना है।

इसके लिए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को शिक्षकों की फोटो एकत्रित कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्कूल के बाहर बोर्ड लगाने की प्रक्रिया भी अवकाश के दौरान ही पूरी करने के लिए कहा गया है।

इस तरह की मिली शिकायतें : अनेक स्कूलों में शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा अपने स्कूल में न पढ़ाकर अपने घर के करीब स्कूल में पढ़ाने की शिकायतें अफसरों को मिलती रही हैं। कई स्कूलों में अन्य स्कूलों की शिक्षिकाएं बातचीत करती मिलीं। इससे पढ़ाई प्रभावित हुई। इस पर संबंधित शिक्षकों का वेतन रोकने की कार्रवाई भी की गई।

बैठक में हुआ निर्णय : पिछले दिनों लखनऊ में बेसिक शिक्षा विभाग के सचिव व अधिकारियों की हुई बैठक हुई। इसमें शिक्षकों की शिकायतों पर चर्चा हुई। इस दौरान स्कूलों के गेट पर शिक्षकों का फोटो लगाने का निर्णय लिया गया। अफसरों का कहना है कि स्कूल के बाहर बोर्ड पर शिक्षक की फोटो होने से अभिभावक व अधिकारी दोनों को वहां तैनात शिक्षक की स्पष्ट जानकारी रहेगी।

फोन नंबर लिखने का विरोध: उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत शर्मा ने शासन के निर्णय का स्वागत किया है। साथ ही मोबाइल नंबर बोर्ड पर लिखने का विरोध किया है। उनका कहना है कि मोबाइल नंबर स्कूल के गेट पर लिखने से शिक्षिकाओं को दिक्कत हो सकती है। शिक्षिकाओं के मोबाइल नंबर देने के निर्णय में बदलाव करना होगा, अन्यथा शिक्षक संघ इसका विरोध करेगा।

सूरतेहाल : जिले में 735 जूनियर हाइस्कूल, 1774 प्राइमरी स्कूल हैं। प्राइमरी स्कूलों में 1493 हेडमास्टर व 4016 सहायक अध्यापक हैं। जूनियर हाईस्कूलों में 196 हेडमास्टर व 1846 सहायक अध्यापक हैं। शहरी क्षेत्र के प्राइमरी स्कूलों में 30 प्रधानाध्यापक व 166 सहायक अध्यापक हैं। जूनियर हाईस्कूलों में एक भी हेडमास्टर नहीं है, जबकि सहायक शिक्षकों की संख्या 4 है।

यह व्यवस्था अवकाश के बाद से लागू करने का विचार है। तैयारियों के निर्देश सभी एबीएसए को दे दिए गए हैं। शिक्षिकाओं के मोबाइल नंबर पर कोई आपत्ति है तो उस पर विचार किया जाएगा।  धीरेंद्र कुमार, बीएसए

शिक्षकों के दूसरे स्कूल में जाने की शिकायतों पर की छुट्टियों में लगाए जाएंगे बोर्ड, मोबाइल नंबर भी लिखे जाएंगे

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