36 शिक्षामित्रों की संविदा समाप्त करने वाले प्रदेश सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया जाने के बाद से शिक्षामित्र प्रदेश की राजधानी से लेकर देश की राजधानी तक उन्होंने धरना प्रदर्शन किया, लेकिन शिक्षामित्रों की केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही नहीं सुन रही है। चुनाव ने समय वादे बहुत किये गए थे। वादा करने वालों ने इनसे वादाखिलाफी कर दी। इतने धरने प्रदर्शन करने के बाद एक आस प्रधानमंत्रीं में जगी थी। जब प्रधानमंत्री दो दिवसीय दौरे पर बनारस आये थे, तब शिक्षामित्रों ने अपनी बात प्रधानमत्री के सामने रखने की कोशिश की, लेकिन उनको अपनी बात प्रधानमत्री के सामने रखने का सौभग्य प्राप्त नहीं हुआ। इससे ग़ुस्साए शिक्षामित्रों ने प्रधानमंत्रीं के कार्यक्रम काले झंडे दिखा कर अपना विरोध प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्रीं के कार्यक्रम में शिक्षामित्रों का उग्र रूप देख शासन ने शिक्षामित्रों की गिरफ्तारियों शुरू कर दी। प्रशासन ने 36 शिक्षामित्रों को गिफ्तार कर जेल भेज दिया था।

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प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में काले झंडे दिखने और अपराधिक अतिचार करने के जुर्म में मुकदमा दर्ज होने के कारण जेल गए सभी 36 शिक्षामित्रों की संविदा समाप्त करने वाले प्रदेश सरकार के आदेश पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रोक लगा दी है। इस पर शिक्षामित्रों ने खुशी जाहिर की है साथ ही हाईकोर्ट को भी धन्यबाद किया। आदर्श समायोजित शिक्षक संघ के जिला महामंत्री रामकृष्ण विश्वकर्मा का कहना है कि हाईकोर्ट के इस फैसले से संगठन की जिलाध्यक्ष रीना सिहं सहित अन्य को राहत मिली है। उन्होंने कहा कि बनारस की जेल में निरुद्ध रहे शिक्षामित्रों को नोटिस जारी करके स्पष्टीकरण प्राप्त करने के बाद जनपद स्तरीय समिति को संविदा समाप्त किये जाने के निर्देश शासन की ओर से दिए गए थे। विभाग उनकी संविदा समाप्त किए जाने की कार्रवाई को अंतिम रूप देने में जुटा ही था, लेकिन गुरूवार को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने शिक्षामित्रों को बड़ी राहत देते हुए सरकार के फैसले पर रोक लगाई है।

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कोर्ट के इस फैसले पर जिला अध्यक्ष रीना ने खुशी जताते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल सूबे के 36 शिक्षामित्रों नहीं बल्कि 1.72 शिक्षामित्रों के स्वभिमान की जीत हुई है।

High Court Stay on 36 Shikshamitra case

 

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