शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पर रोक पर हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी, नेताओ का इस पर क्या कहना?

नई दिल्ली : हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति एके चावला की पीठ ने दिल्ली के शिक्षा निदेशालय की ओर से शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने पर कड़ी नाराजगी जताई। कड़े शब्दों में कहा गया कि अगर स्थायी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को लेकर जल्द कदम नहीं उठाए गए तो वे अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने में भी संकोच नहीं करेंगे। ऐसे अफसरों को जेल भेजा जाएगा। हाई कोर्ट ने अगले आदेश तक सरकार के Guest Teachers की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि 2010 के बाद नियुक्त हुए अतिथि शिक्षकों की पदोन्नति व नियुक्ति पर फिलहाल रोक रहेगी।

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Delhi State Subordinate Service Selection Board (DSSSB) ने 7 अगस्त को सरकारी स्कूलों में 8,914 नियमित शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवेदन मंगाए थे, लेकिन 24 अगस्त को भर्ती प्रक्रिया वापस ले ली गई। इस पर वकील अशोक अग्रवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में अवमानना की याचिका लगाते हुए कहा कि ऐसा करना हाई कोर्ट के पूर्व के आदेश की अवहेलना करने के समान है। इस पर सरकार ने अपने हलफनामा में बुधवार को कहा कि सरकारी स्कूलों में नियमित शिक्षकों के खाली पदों को भरने में अतिथि शिक्षकों को वरीयता दी जा रही है। विधानसभा की ओर से पारित प्रस्ताव उपराज्यपाल के पास विचाराधीन है। इस प्रस्ताव पर निर्णय होने तक भर्ती पर अस्थायी रोक जारी रहेगी। जवाब पर हाईकोर्ट ने कहा कि पहली नजर में सरकार का यह कदम जानबूझ कर उनके आदेश की अनदेखी करने वाला लगता है।

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हलफनामा में सरकार ने कहा कि स्थायी शिक्षकों की नई भर्ती प्रक्रिया में अतिथि शिक्षकों को न्यूनतम 0.75 और अधिकतम 2.25 फीसद तक अतिरिक्त अंक देने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शैक्षणिक सत्र 2012-13 से 2015-16 में 120 दिन कार्य करने वाले अतिथि शिक्षकों को नियुक्ति में वरीयता दी जाएगी। उपराज्यपाल ने अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति में उम्र सीमा में भी छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। दिल्ली के स्कूलों के लिए 8,914 और निगमों के स्कूलों के लिए 5,906 primary teachers की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस पर हाई कोर्ट ने सरकार को यह बताने के लिए कहा था कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 27 हजार पद खाली पड़े हैं। महज 8,914 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया की क्यों शुरू की गई।

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अतिथि शिक्षकों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही सरकार

नई दिल्ली : अतिथि शिक्षकों को नियमित करने के दिल्ली सरकार के कैबिनेट के निर्णय पर भाजपा ने सवाल खड़ा कर दिया है। उसका कहना है कि भाजपा के दबाव की वजह से सरकार ने अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का फैसला तो किया, लेकिन इसमें कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। यह किसी ठोस आधार पर लिया गया निर्णय नहीं है। यह केवल वोट बैंक की राजनीति है। इस तरह से सरकार फिर शिक्षकों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल सरकार का कैबिनेट निर्णय हवा-हवाई है। शिक्षकों को नियमित करने वाले बिल को कैबिनेट में लाने से पहले संबंधित विभागों से स्वीकृति नहीं ली गई है। ऐसे आधे-अधूरे बिल को विधानसभा में पारित करने से कोई समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि बिल लाने के लिए औपचारिक प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार ने ढाई वर्ष के कार्यकाल में अतिथि शिक्षकों को नियमित करने के नाम पर उनकी भावनाओं और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। कैबिनेट निर्णय भी इसी कड़ी का हिस्सा है।

सरकार के रवैये की वजह से अध्यापकों की भर्ती का मामला उलझता जा रहा है। इसका शिक्षा के स्तर पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की भारी कमी है। आम आदमी पार्टी ने अनुबंध के आधार पर काम करने वाले सभी कर्मचारियों को नियमित करने का वादा किया था, लेकिन ढाई वर्ष में एक भी कर्मचारी नियमित नहीं हुआ है। दिल्ली प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी अतिथि शिक्षकों के साथ है। इसलिए सरकार इस संबंध में कानूनी तरीके से कैबिनेट नोट लेकर आए और विधानसभा में इसे पारित करे।’>>नियमित करने के निर्णय में कानूनी प्रक्रिया का नहीं हुआ पालन : विजेंद्र गुप्ता कहा, आधे-अधूरे बिल को विधानसभा में पारित करने से नहीं निकलेगा समाधान

राजधानी में सरकारी स्कूल छोड़ चुके हैं 98 हजार विद्यार्थी: अजय माकन

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार प्राथमिक शिक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी कह रहे हैं। इसको लेकर कांग्रेस ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय माकन का कहना है कि सरकारी स्कूलों की से विद्यार्थी स्कूल छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। वर्ष 2016 तक लगभग 98 हजार विद्यार्थी सरकारी स्कूल छोड़ चुके हैं। इसके लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने के आंकड़े को गलत साबित करने की चुनौती भी दी है।

उनका कहना है कि अरविंद केजरीवाल सरकार प्राथमिक शिक्षा के नाम पर दिल्ली के लोगों को गुमराह कर रही है। हकीकत यह है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर गिर रहा है। दिल्ली सरकार के आंकड़े बताते हैं कि सरकारी स्कूलों से विद्यार्थी नाम कटवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस का शासन खत्म होने के बाद से वर्ष 2016 तक 98 हजार के करीब विद्यार्थी सरकारी स्कूल छोड़ चुके हैं। यदि केजरीवाल और सिसोदिया इस आंकड़े को गलत साबित कर देंगे तो वे राजनीति से सन्यास ले लेंगे। माकन ने कहा कि वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव के समय केजरीवाल ने कहा था कि जनवरी 2014 में ही उन्होंने अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का आर्डर कर दिया है और आम आदमी पार्टी की दोबारा सरकार बनते ही सभी शिक्षक नियमित हो जाएंगे। सच्चाई सामने है, शिक्षक अब भी दरबदर हो रहे हैं। अब फिर से उपमुख्यमंत्री ने इन्हें नियमित करने की घोषणा की है।

उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षकों के नियमित नहीं होने के लिए केजरीवाल सरकार उपराज्यपाल को जिम्मेदार ठहराती है। ऐसा कर वह शिक्षकों को गुमराह कर रही है। जब सरकार के पास शराब के ठेके खोलने का अधिकार है तो शिक्षकों को वह नियमित क्यों नहीं कर सकती है? अपने अधिकार के लिए आवाज उठाने वाले अतिथि शिक्षकों को सरकार प्रताड़ित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कोई बहाना न बनाए और इन्हें नियमित करने की घोषणा पर अमल करे। आरोप, सरकारी स्कूलों का हो गया है बुरा हाल कांग्रेस ने दिल्ली की आप सरकार पर निशाना साधा

बिल लाकर अतिथि शिक्षकों के मुद्दे को दफन करना चाहती है सरकार : कपिल

नई दिल्ली : सरकारी स्कूलों में वर्षो से पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों की नौकरी पक्की करने को लेकर दिल्ली सरकार के कैबिनेट का फैसला हवा-हवाई है। दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री कपिल मिश्र ने सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई है।1उन्होंने मुख्यमंत्री से सिर्फ एक सवाल पूछा है कि क्या वे कह सकते हैं कि अतिथि शिक्षकों के मामले पर विधानसभा में बिल लाने के बाद अगले दिन से उनकी नौकरी पक्की हो जाएगी? जवाब होगा न। क्योंकि विधानसभा में संवैधानिक नियमों की अनदेखी कर लाए गए स्वराज व लोकपाल जैसे महत्वपूर्ण बिल ठंडे बस्ते में पड़े हैं। अब सरकार इन हजारों अतिथि शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।

कपिल का कहना है कि विधानसभा से पारित बिल होने के बाद जब अतिथि शिक्षकों की नौकरी पक्की नहीं होगी तो आम आदमी पार्टी की सरकार इसके लिए फिर उपराज्यपाल और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराएगी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अतिथि शिक्षकों के साथ धोखा कर रहे हैं। सरकार ऐसा बिल लाने की तैयारी में है कि वे कभी भी पक्के न हो सकें। एक बार गलत बिल विधानसभा में आ गया तो हमेशा के लिए अतिथि शिक्षकों की नौकरी पक्की करने की प्रक्रिया रुक जाएगी। अतिथि शिक्षकों के मसले पर लाए जाने वाले बिल के लिए वैसे ही नियमों का उल्लंघन किया गया है जैसे जन लोकपाल और स्वराज के कानून में किया गया, यानी जान-बूझकर मुद्दे से पल्ला झाड़ने की कोशिश की गई।

High court expresses displeasure over the ban on teachers recruitment process

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