शिक्षकों के तबादले को हरियाणा मॉडल में यूं ही नहीं दिलचस्पी

परिषदीय और राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की बेतरतीब तैनाती से जूझ रही उत्तर प्रदेश सरकार ने अध्यापकों के तबादले के लिए हरियाणा की शिक्षक स्थानांतरण नीति में दिलचस्पी अकारण नहीं दिखाई है। स्कूलों में शिक्षकों की वास्तविक मांग, समानता और पारदर्शिता के आधार पर तैयार की गई इस स्थानांतरण नीति के जरिये किए जाने वाले तबादलों में मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं है। शिक्षकों के तबादले वेब आधारित एप्लीकेशन के जरिये ही होते हैं।

हर पांच साल में तबादला : हरियाणा की शिक्षक स्थानांतरण नीति के तहत जिला मुख्यालय से दूरी के आधार पर हर जिले के स्कूलों को सात जोन में बांटा गया है। यह मानते हुए कि एक शिक्षक 35 साल तक पढ़ाता है, उसे अपने सेवाकाल के दौरान सातों जोन में सेवाएं देनी होंगी। इससे तबादलों में नगर और ग्रामीण क्षेत्र का अंतर मिट जाता है। पांच साल से एक ही स्कूल/जोन में तैनात शिक्षकों का तबादला अनिवार्य रूप से दूसरे जोन में कर दिया जाता है। वहीं, तीन साल के बाद शिक्षक तबादले की इच्छा जता सकता है।

रिक्त पदों की सूची वेबसाइट पर : तबादलों में ईमानदारी और पारदर्शिता के लिहाज से शिक्षकों के रिक्त पदों की सूची शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर अध्यापकों से आवेदन (विकल्प) लिए जाने से पहले ही प्रदर्शित कर दी जाती है। शिक्षकों के भारांक भी वेबसाइट पर प्रदर्शित कर दिये जाते हैं ताकि अध्यापकों को इसकी जानकारी हो सके।

आवेदन और तबादले की प्रक्रिया ऑनलाइन : शिक्षकों की तैनाती के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाते हैं। इसके लिए हरियाणा के शिक्षा विभाग ने वेब आधारित एप्लीकेशन तैयार किया है। तबादलों के इच्छुक शिक्षकों को ऑनलाइन आवेदन के जरिये अपनी पसंद के जोन और स्कूल के विकल्प देने होते हैं। शिक्षकों का तबादला और उन्हें स्कूल का आवंटन उनकी अर्हता, विकल्प और कंपोजिट स्कोर के आधार पर किया जाता है।

ऐसे होती है कंपोजिट स्कोर की गणना : किसी रिक्ति के सापेक्ष उस पद पर तैनाती शिक्षक के कंपोजिट स्कोर के आधार पर की जाती है। जिस शिक्षक का कंपोजिट स्कोर अधिकतम होगा, रिक्ति के सापेक्ष उसका ट्रांसफर किया जाएगा। कंपोजिट स्कोर का निर्धारण मुख्य रूप से शिक्षक की उम्र, शैक्षिक उपलब्धियों, लिंग, वैवाहिक स्थिति, बीमारी, दिव्यांगता आदि के आधार पर किया जाता है। सबके अलग-अलग भारांक निर्धारित हैं।

दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती पर वेतनवृद्धि

यदि कोई शिक्षक दुर्गम और पिछड़े क्षेत्र के स्कूल में ट्रांसफर चाहता है तो उसे वहां तैनात करने पर दो वेतनवृद्धि दी जाती है। पिछड़े से सामान्य क्षेत्र में तबादला होने पर यह वेतनवृद्धि का लाभ समाप्त हो जाता है। उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा और बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने हरियाणा के अपर मुख्य सचिव शिक्षा पीके दास व अपर शिक्षा निदेशक वीरेंद्र सहरावत ने अपने राज्य में लागू शिक्षक स्थानांतरण नीति का शुक्रवार को प्रस्तुतीकरण किया था। यही वजह है कि प्रस्तुतीकरण के बाद उप मुख्यमंत्री ने अध्यापकों के स्थानांतरण के लिए शिक्षकों के सेवा संबंधी विवरणों का डिजिटल डाटाबेस तैयार करने का निर्देश दिया। 1

यह हुए फायदे ऑनलाइन स्थानांतरण नीति के जरिये 2016-17 में हरियाणा में लगभग 35 हजार शिक्षकों के तबादले हुए। इनमें से 98 फीसद शिक्षकों को उनके द्वारा विकल्प के तौर पर दिये गए स्कूलों में तैनाती मिली। 66 फीसद शिक्षकों को उनकी प्रथम वरीयता, 16 प्रतिशत को द्वितीय वरीयता और नौ फीसद को तृतीय वरीयता के स्कूल मिले। 91 फीसद शिक्षकों को उनकी प्रथम तीन वरीयताओं में शामिल जोन में तैनाती मिली। जिन स्कूलों में वर्कलोड नहीं था, वहां सरप्लस शिक्षकों के पद हटाए गए। इस प्रक्रिया के जरिये 25 से 30 फीसद ऐसे शिक्षक भी चिह्न्ति किए गए जिनसे क्षमता से कम काम लिया जा रहा था।

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