फर्जी अभिलेख के सहारे नौकरी हासिल करने वाले 15 शिक्षकों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने के लिए पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा गया

गोंडा : फर्जीवाड़ा कर नौकरी पाने वाले 5 अध्यापकों की सेवा समाप्त कर दी गई। इनके शैक्षिक डॉक्यूमेंट फर्जी पाए जाने व गलत तथ्य देने के मामले में इन शिक्षकों पर कार्यवाही की गई। इन शिक्षकों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही भी कराई जाएगी।

दीपक वर्मा, मनोज कुमार, चंद्रकांत, वैभव यादव, शिवकुमार शर्मा, संदीप कुमार वर्मा, देवेश चंद्र वर्मा, राघवेंद्र कुमार वर्मा, सुकांत यादव, आशीष कुमार, वेद प्रकाश, सुबोध कुमार, अशोक कुमार, चंदन यादव व जीतेंद्र कुमार की बेसिक शिक्षा विभाग की भर्ती में नियुक्ति की गई थी। बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार देव पांडेय ने बताया इन शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया होने के बाद इनको तैनाती भी कर दिया, जो अभ्यर्थी कटऑफ मेरिट से बहार हुए थे उन अभ्यर्थियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाहिर कर इनकी नियुक्ति पर सवाल उठाए।

शिक्षण संस्थानों से इन नुक़्तियों से संबंधित शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कराया गया। परीक्षा नियामक प्राधिकरण ने संदीप कुमार वर्मा, अशोक कुमार, चंदन यादव व जीतेंद्र कुमार की टीईटी की डिग्री को फर्जी करार दिया। इसके साथ ही बेलसर व कर्नलगंज में तैनात रहे वैभव यादव व सुकांत यादव फीरोजाबाद में नौकरी करते मिले। शेष नौ शिक्षकों ने आवेदन में गलत तथ्य दर्शाए हुए थे। शैक्षिक अभिलेखों की जाँच से इसका खुलासा हुआ, जिसके बाद तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच कराई गई।

सफाईकर्मी बन गए ‘बाबू’

गांवों में तैनात सफाईकर्मी कलेक्ट्रेट और विकास भवन के कई विभागों में बाबू बने बैठे हैं। ऐसे लगभग 20 सफाईकर्मी हैं जो पंचायत राज समेत विभिन्न दफ्तरों में लिपिकीय व अन्य कार्यों को संभाल रहे हैं। इनमे से कई सफाईकर्मियों ने अफसरों से सांठगांठ कर मलाईदार पटल भी ले लिया है। जबकि कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने वाहन चलाने और खाने बनाने का हुनर बताकर अफसरों का दिल जीत लिया। लिहाजा, वे साहब के घर पर तैनाती पा गए हैं।

विकास भवन ने जिला पंचायत राज विभाग कार्यालय में प्रवेश करते ही गरुण सिंह, निसार अहमद, गंगा प्रसाद, मुनीष कुमार आदि सफाईकर्मी कुर्सी-मेज पर कम्प्यूटर सजाए कामकाज निपटाते दिख जाते हैं। इनमें वे नाम भी हैं, जिन पर विभाग के लिपिकों के साथ सफाईकर्मियों की ही तैनाती में लाखों रुपये की वसूली का आरोप लग चुका है। इसी विभाग में अजय कुमार समेत तीन सफाईकर्मियों को बतौर चालक रख लिया गया है।

उधर, निदेशक पंचायत राज को भेजी गई एक शिकायत में बेलू, मनोज कुमार, आशा, माया के अवैध रूप से विकास भवन के निचले तल पर कार्य करने का जिक्र किया गया है। उसमें यह भी कहा गया है कि अजय मिश्र, राजकुमार, जोखू व फूलचंद्र आदि को अफसरों के आवासों में फॉलोवर के रूप में रखा गया है। इसके इतर गत वर्ष से ही दो सफाईकर्मी कलेक्ट्रेट में डीएम कार्यालय के सामने बने शिकायत प्रकोष्ठ में अवैध संबद्धता का लाभ उठा रहे हैं।

कार्यालयों में सफाईकर्मियों के संबद्धता की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होंगे, उनपर कार्रवाई की जाएगी। हरेंद्रवीर सिंह जिलाधिकारी

बीएड फर्जीवाड़े में जेल भेजे गए चारों कर्मचारी निलंबित

आगरा : डॉ. बीआर अंबेडकर विवि की फर्जी बीएड डिग्री पाकर नौकरी कर रहे 4,570 शिक्षकों को चिह्न्ति करने के लिए शासन ने 27 अक्टूबर तक का समय दिया था, लेकिन विभाग ने एक भी शिक्षक को चिह्न्ति नहीं किया। बीएड के सत्र 2005 फर्जीवाड़े और फर्जी सत्यापन के मामले में एसआइटी ने 24 अक्टूबर को चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित ने चारों कर्मचारियों को निलंबित कर दिया। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग में भी फर्जी डिग्री से नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों के नामों को लेकर हड़कंप की स्थिति है।

 

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