प्रदेश भर के सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों की शिक्षक भर्ती में एक दर्जन बीएसए फंसे

प्रदेश भर के सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों की शिक्षक भर्ती में जमकर गड़बड़ियां हुई हैं। विभागीय अफसरों ने आठ माह पहले कई बेसिक शिक्षा अधिकारियों को चिह्न्ति किया, उसकी अब जांच शुरू हो गई है। शिक्षा निदेशालय और मंडल अफसरों की साझा जांच टीम को तमाम जिलों में नियुक्ति विज्ञापन, अनुभव व योग्यता जांचने में खानापूरी मिली है। कई जिलों में तो बिना निर्देश के ही लिपिकों को नियुक्ति दे दी गई। ऐसे एक दर्जन बीएसए पर जल्द कार्रवाई होने के आसार हैं। अशासकीय जूनियर हाईस्कूल में शिक्षकों की कमी दूर करने को न्यूनतम मानक के तहत शैक्षिक पदों को भरने के आदेश छह नवंबर 2015 को हुए। पहले अशासकीय सहायता प्राप्त 2888 जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक व assistant teachers की कमी सामने आई थी। शासन ने पदों की संख्या तय करने के बजाए सीधी भर्ती से न्यूनतम मानक पूरा करने का आदेश दिया।

पढ़ें- 12,460 टीचरों की भर्ती पर रोक

तत्कालीन शिक्षा निदेशक बेसिक डीबी शर्मा ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को शिक्षकों की सीधी भर्ती करने के लिए पहले 31 मार्च 2016 तक की मियाद तय की थी, लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी। बाद में इसे बढ़ाकर 31 जुलाई 2016 किया गया। बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने इन भर्तियों में जमकर मनमानी की। जिलों में भर्ती से पहले विज्ञापन तक नहीं निकाले गए, बल्कि साठगांठ करके चहेतों को प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक के रूप में तैनाती दी गई। नियुक्ति से पूर्व अनुभव प्रमाणपत्र का अभिलेखों से मिलान नहीं किया गया।

पढ़ें- 72825 टीचर भर्तीः यूपी में भर्ती हुए अभ्यर्थी नौकरी करते रहें- सुप्रीम कोर्ट 

अफसरों ने प्रदेश भर में 800 नियुक्तियां की हैं। इसमें 147 प्रधानाध्यापक व 653 सहायक अध्यापक हैं। इनमें गोरखपुर सबसे अधिक भर्ती हुई। पिछले दिनों वहां के बेसिक शिक्षा अधिकारी को नियुक्ति में खामी के कारण निलंबित किया जा चुका है। इसके बाद बलिया में भी गड़बड़ी उजागर हो चुकी है, लेकिन प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण वहां के बीएसए पर अभी कार्रवाई नहीं हुई है।

निदेशालय से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि बलिया के बीएसए पर बड़ी कार्रवाई होना तय है। इसके बाद कानपुर, आजमगढ़, वाराणसी, लखनऊ, इलाहाबाद व बस्ती आदि में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां हुई हैं। वहीं, देवरिया, आगरा, चंदौली, वाराणसी आदि जिलों की नियुक्तियों में जमकर घालमेल किया गया है। सरसरी तौर पर तमाम गड़बड़ी पहले ही पकड़ में आ चुकी है, लेकिन अब जांच टीमों को भी ऐसे सबूत मिले हैं। कई जिलों में मनमाने तरीके से लिपिकों को भी नियुक्ति दी गई है, जबकि शिक्षणोत्तर कर्मियों की नियुक्ति नहीं होनी थी।

पढ़ें- उप्र में भर्ती हो चुके 66,000 शिक्षकों से नहीं होगी छेड़छाड़-सुप्रीम कोर्ट

बेसिक शिक्षा अपर निदेशक विनय कुमार पांडेय ने बताया कि शासन ने एक स्कूल में प्रधानाध्यापक, चार सहायक अध्यापक का मानक पूरा किए जाने के निर्देश थे। उनमें गड़बड़ियों की शिकायतें होने पर इलाहाबाद, वाराणसी, मिर्जापुर, गोरखपुर, देवीपाटन समेत मंडलों में नियुक्ति व अन्य कार्यो की जांच हो रही है। इसके लिए शिक्षा निदेशालय और मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय के अफसरों को लगाया गया है।

जिलों में नियुक्ति विज्ञापन, अनुभव व योग्यता जांचने में हुई खानापूर्ति शिक्षा निदेशालय और मंडल अफसरों की साझा टीम जांच में जुटी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *