गोंडा और फिरोजाबाद में भी हुईं फर्जी शिक्षक भर्तियां

मथुरा की तरफ फिरोजाबाद और गोंडा में बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षकों की भर्ती की शिकायतें एसटीएफ को मिली हैं। एसटीएफ ने अपने स्तर से इन शिकायतों की पड़ताल शुरू कर दी है। फिरोजाबाद में भर्तियों में फर्जीवाड़े की शिकायतें वर्ष 2017 से मिल रही थीं। लेकिन मामले को दबा दिया गया। अब मथुरा का खुलासा होने के बाद लोगों ने एसटीएफ को इस संबंध में दस्तावेज भेजे हैं। उधर, मथुरा में शिक्षक भर्ती घोटाले की आंच बड़ों तक पहुंचते ही पुलिस की विवेचना और एसटीएफ की कार्रवाई थम सी गई है। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भी बाकी जिलों में गड़बड़ी की जांच करवाने से कतरा रहे हैं। क्योंकि मथुरा में हुए घोटाले की अभी तक हुई पड़ताल में यह सामने आया है कि गड़बड़ियां बीजेपी सरकार के शासन काल में ही हुई हैं।

सत्यापन अधूरा, फिर भी दे दी क्लीन चिट: फिरोजाबाद में अंकित और राघवेंद्र नामक अभ्यर्थियों ने वर्ष 2017 में जनसुनवाई पोर्टल के जरिए सहायक अध्यापकों की भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत की थी। तत्कालीन बीएसए डॉ सच्चिदानंद यादव ने शिकायत को खारिज कर दिया। इसी महीने राघवेंद्र सिंह की शिकायत के जवाब में बीएसए दफ्तर ने दस्तावेजों का सत्यापन पूरा हुए बिना ही शिकायत को खारिज कर दिया गया जबकि भीमराव विश्वविद्यालय द्वारा सिर्फ 50 प्रतिशत अभ्यर्थियों के स्नातक के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा हुआ है। अंकित ने अपनी शिकायत में 100 से ज्यादा फर्जी नियुक्तियां किए जाने की बात कही है। राघवेंद्र सिंह ने अपनी शिकायत में लिखा है कि यह मामला मथुरा से भी बड़ा है। दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है लेकिन अभ्यर्थियों के सत्यापन का काम आज भी अधूरा है। बिना सत्यापन के मथुरा में घोटाले की आंच बड़ों तक पहुंचते ही थमी जांच की रफ्तार

26 जून को आत्महत्या की धमकी: गोंडा में एक व्यक्ति ने शिक्षक भर्ती में बड़ा घोटाला होने की शिकायत ट्वीट पर की है। @VijayPa56 के ट्विटर हैंडल पर उसने भर्ती के नाम पर दो लाख 90 हजार रुपये लिए जाने के मामले में हुए सुलहनामा को शेयर किया है। यह सुलहनामा 21 जुलाई 2017 का है। एक अन्य ट्वीट में विजय पांडेय ने 26 जून 2018 को मामले में कार्रवाई न होने पर खुदकुशी करने की बात लिखी है। एसटीएफ दोनों ही शिकायतों की गंभीरता से जांच करा रही है। इसके साथ ही कुछ अन्य जिलों से भी फोन के जरिए भर्ती में घोटाले की शिकायतें की गई हैं।

रिपोर्ट के इंतजार में थमी कार्रवाई: शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच में लीपापोती शुरू हो गई है। मथुरा भर्ती घोटाला सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरपी सिंह ने एसटीएफ की रिपोर्ट मिलने के बाद बाकी जिलों में भी जांच कराने की बात कही थी। लेकिन चार दिन बाद भी एसटीएफ अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग को अपनी रिपोर्ट नहीं भेज पाई है। मथुरा में बीएसए दफ्तर के रेकॉर्ड रूम का ताला तीसरे दिन भी नहीं खुल पाया है क्योंकि जिले के कप्तान प्रभाकर चौधरी छुट्टी पर हैं और उन्होंने अभी तक इस मुकदमे के विवेचक के लिए सीओ का नाम तय नहीं किया है। विवेचक और मैजिस्ट्रेट की मौजूदगी में ही रिकॉर्ड रूम का ताला खुलना है। मथुरा के कप्तान ने सोमवार को ताला खुलवाने का आश्वासन दिया है।

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