योगी सरकार से निराश शिक्षामित्र, क्या अखिलेश यादव का साथ लेंगे

माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किये जाने के बाद से शिक्षामित्र सड़क पर आ गए है। अब शिक्षामित्र लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे। शिक्षामित्रों ने लखनऊ से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर तक प्रदर्शन किया था। उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में हजारों की संख्या में महिलाएं और पुरुष शिक्षामित्रों ने डायट से लेकर जिलाधिकारी कार्यालय तक धरना प्रदर्शन किया था। मगर सरकार उनकी सुन नहीं रही हैं चाहे वो मोदी सरकार हो या फिर योगी सरकार हो दोनों ही सरकारें शिक्षामित्रों के मामले में चुप्पी सादे हुए है। शिक्षामित्रों को सभी जगह से निराशा ही मिल रही है। शिक्षमित्रों को अब समझ नहीं आ रहा कि वो क्या करे। जब से सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किया है तब से अब तक लगभग 100 शिक्षामित्रों की जान जा चुकी है। इन सब को रोकने के लिए शिक्षामित्रों को कोई ठोस कदम उठाना होगा।

पढ़ें-  वाराणसी :पीएम मोदी से मिलने पहुंचे शिक्षामित्रों को पुलिस प्रशासन ने नाटकीय ढंग से किया नजरबंद

शिक्षामित्रों से वादा खिलाफी

जब उत्तर प्रदेश में लोकसभा के चुनाव हो रहे थे। तब शिक्षामित्रों से वादा किया गया था कि हमारी सरकार आएगी तो हम शिक्षामित्रों का समायोजन तीन महीने के अंदर कर देंगे। सरकार बनते ही सारे वादे भूल गए। शिक्षामित्रों की अब कोई नहीं सुन रहा। इसलिए शिक्षामित्र धरना प्रदर्शन कर रहे है। शिक्षामित्रों ने कहा कि सरकार को उनका वादा याद दिलाने की कोशिश कर रहे है। ऐसा ही नजारा वाराणसी में पीएम की जानसभा में देखने को मिला। शिक्षामित्रों ने अपनी मांगों को प्रधानमंत्री के सामने रखने के लिए उनसे समय माँगा था। मगर उन्होंने शिक्षामित्रों से मुलाकात नहीं की। इस पर शिक्षामित्र भड़क गए, मोदी की जान सभा में नारेबजी करने के साथ साथ काले झंडे दिखाने लगे इससे मोदी सभा में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। स्थिति को देख मोदी अपना भाषण जल्दी ख़त्म कर दिल्ली लोट गये। शिक्षामित्रों का कहना है कि हम पीएम मोदी और योगी को उनका वादा याद दिलाने वाराणसी आये थे। आज वही शिक्षामित्रों की सुन नहीं रहे है।

पढ़ें- शिक्षामित्रों से रिक्त हुए 137000 सहायक अध्यापकों के पदों पर तत्काल विधि / नियम के अनुसार पदों को भरने के सम्बन्ध में कोर्ट ने दिया निर्देश: देखें आर्डर कॉपी

क्या शिक्षामित्र अखिलेश यादव की मदद लेंगे?

सूत्रों ने बताया कि सभी शिक्षामित्र संगठन को लगने लगा है कि योगी आदित्यनाथ की सरकार उनके लिए कुछ नहीं करने वाली है। शिक्षामित्रों का यह भी कहना कि अब योगी सरकार से कोई उम्मीद नहीं रही है। इसलिए शिक्षामित्र संगठन पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मदद लेंगे। हालांकि जब इस मामले में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ क अध्यक्ष गाजी इमाम आला से बात की गई, तो उन्होने बताया कि ये तो समय ही बताएगा और उन्होंने यह भी कहा कि फिलाल तो प्रत्येक शिक्षामित्र को प्रदेश सरकार व मोदी सरकार से हताश और निराशा ही हाथ लगी है। अब इन दोनों सरकार से कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है।

पढ़ें- वाराणसी: पीएम मोदी की जनसभा में शिक्षामित्रों ने मोदी वापस जाओ के नारे लगाये और काले झंडे दिखाये

गाजी इमाम आला ने बताया की कि लोकतांत्रिक देश में हर व्यक्ति बात रखने का पूरा अधिकार है। इसी अधिकार उपयोग कर प्रदेश के शिक्षामित्र एकत्रित हुए और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का काम किया। इस नाते सरकार का फर्ज था कि वो शिक्षामित्रों की बात सुने और कोई ठोस कदम उठये, जिसे प्रदेश के शिक्षामित्रों की रोजी रोटी बच सके।

शिक्षामित्र आहत सरकार रवैया से

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिलाध्यक्ष वीरेन्द्र छौंकर ने बताया कि शिक्षामित्र योगी व मोदी सरकार से आहत हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ से दो बार शिक्षामित्रों की वार्ता हुई। सीएम योगी आदित्यनाथ के आश्वासन पर शिक्षामित्रों ने धरना समाप्त किया। पांच सदस्यीय कमेटी गठित कर एकमत प्रस्ताव बनाने के लिए कहा गया। शासन स्तर पर कई बैठक हुई लेकिन उन बैठकों का कोई नतीजा नहीं निकला। सुप्रीम कोर्ट ने समायोजन रद्द किया, यदि योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान कर रही है। शिक्षामित्रों के लिए अन्य रास्ते भी खुले थे, जिससे सरकार के सामने भी कोई परेशानी न आए और शिक्षामित्रों का भी जीवन भी बच जाए। उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षामित्र की 17 साल की सेवा को नजरअंदाज कर रही है। सरकार कह रही है कि हम समायोजन नहीं कर सकते लेकिन आप का मानदेय बड़ा सकते है। सरकार ने मानदेय बड़ा कर 10000 रूपये कर दिया है। लेकिन 10 हज़ार मानदेय शिक्षामित्रों को स्वीकार नहीं है। शिक्षामित्रों की मांग है कि सामान कार्य सामान वेतन।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *