शिक्षकों ने हक के लिए बुलंद की आवाज

नई दिल्ली : Primary school के teachers ने अपने हक के लिए बृहस्पतिवार को जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की। akhil bhartiya prathmik shikshak sangh के बैनर तले जुटे शिक्षकों ने कहा कि उन्हें सातवें वेतन आयोग का समुचित लाभ मिले। शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की भी मांग की। एआइपीटीएफ के अध्यक्ष रामपाल सिंह ने कहा कि प्रत्येक माह शिक्षक अपने वेतन से पैसे इसलिए कटवा रहे हैं, ताकि बुढ़ापे में पेंशन मिले, लेकिन सरकार पेंशन का पैसा शेयर बाजार में लगा रही है। teachers की यह जमा निधि किसी भी समय डूब सकती है।

रामपाल ने कहा कि शिक्षकों में पेंशन योजना को लेकर भ्रांतियां है। जो राशि teachers के वेतन से ली जा रही है, उसका निवेश म्यूचुअल फंड एवं शेयर बाजार में किया जा रहा है। बाजार के रिस्क पर शिक्षकों को पेंशन मिलेगी, यह योजना सही नहीं है। शिक्षकों को मेडिकल छुट्टियां, व ईएल देने की सिफारिश की गई थी, जबकि सिर्फ मेडिकल की छुट्टी देने की बात कही गई है। वेतन में कम बढ़ोतरी की जा रही है। प्रदर्शन में दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान आदि राज्यों के शिक्षक पहुंचे थे। शिक्षकों ने कहा कि यदि उनकी मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया गया तो उनका आंदोलन उग्र रूप लेगा।

देश का भविष्य गढ़ने वालों का ही भविष्य धूमिल : जन्मदाता से ज्यादा महत्व teachers का होता है, क्योंकि वह बच्चे और देश के भविष्य को गढ़ता है। वह खुद बुलंदी पर पहुंचने की ख्वाहिश नहीं रखते, लेकिन इतना जरूर चाहते हैं शिक्षा के मंदिर में वह भी दीया जलाते रहे। जंतर-मंतर पर आयोजित धरने में दिल्ली के ऐसे अध्यापक भी पहुंचे, जिन्हें बड़े-बड़े मुद्दों से नहीं बल्कि छोटी-छोटी जरूरतों से मतलब था। वे अपने भविष्य को सुरक्षित रखना चाहते थे। अध्यापक नावेद कहते हैं कि स्कूलों में जल्द ही नए अस्थायी शिक्षक आ जाएंगे, इसके बाद हम कहां जाएंगे। घर का खर्च कैसे चलेगा।

अध्यापिका नीलू कहती हैं कि अस्थायी teachers को प्रशासनिक तंत्र ने ही नियुक्त किया था। इसके बावजूद उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शिक्षक सतीश मकरोलिया कहते हैं कि primary school को काफी समय से तवज्जो नहीं दी जा रही है। हमें विभागीय असमानताओं का सामना करना पड़ रहा है। दीपक पंत कहते हैं कि सातवें वेतन आयोग की कई सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है। अधिकारियों से लेकर नेताओं तक से संपर्क किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। शिक्षक शमशुद्दीन कहते हैं कि धरना-प्रदर्शन करने पर सिर्फ आश्वासन मिलता है। सविता का कहना है कि डीएसएसएसबी जल्द ही अस्थायी शिक्षकों की नियुक्ति करेगा। इसमें जो आयु सीमा रखी गई है, वह हम लोगों से मेल नहीं खाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.