अब 20 भाषाओँ में होगी सीटेट की परीक्षा

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी CTET को पहले की तरह 20 भारतीय भाषाओं में आयोजित करने का आदेश दिया है। मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए सीबीएसई को CTET में शामिल करने का निर्देश दिया है। सीबीएसई CTET के लिए नई अधिसूचना जारी करेगी। सीबीएसई ने पिछले हफ्ते दिल्ली हाई कोर्ट के चार महीने के अंदर परीक्षा कराने के निर्देश पर १६ सितम्बर को परीक्षा कराने की अधिसूचना जारी करि थी।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर मुताबिक भारतीय भाषाओं बढ़ावा देने के मकसद से CTET में 20 भारतीय भाषाओं का शामिल किया गया है उन्होंने आगे कहा ‘ सीटीईटी की परीक्षा अंग्रेजी , हिंदी , असमिया , बांग्ला , गारो , गुजराती , कन्नड़ , खासी , मलयालम , मणिपुरी , मराठी , मिजो , नेपाली , उड़िया , पंजाबी , संस्कृत , तमिल , तेलुगु , तिब्बती और उर्दू में ली जाएगी।

उधर केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) में 20 भारतीय भाषाओं को शामिल करने के निर्देश के चलते सीबीएसई को तैयारी करने के लिए और वक्त चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट ने 4 में CTET की परीक्षा कराने का निर्देश दिया था। 16 सितम्बर को प्रस्तावित CTET में हिंदी इंग्लिश व संस्कृत को शामिल किया गया था। ऐसे में उम्मीद है कि सीबीएसई दुबारा हाई कोर्ट जाकर 20 भारतीय भाषाओं कि बात कहकर और समय मांगने कि बात कहेगा। आप को बता दे 2016 के बाद से सीबीएसई ने CTET का आयोजन नहीं किया। इसी के चलते देश में हज़रों बीएड व एमएड डिग्रीधारक सरकारी स्कूलों में शिक्षक पद के लिए आवेदन नहीं कर सकते, क्योकि CTET अनिवार्य है।

कनिमोझी के ट्वीट से गरमाई थी सीटेट (CTET) पर राजनीति, 16 भाषाओं को बाहर करने का फैसला बताया था गलत:  डीएमके नेता कनिमोई ने 17 भाषाओं को हटाने के सीबीएसई के पूर्व के फैसले को लेकर ट्विटर पर अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा कि यह फैसला अलग अलग क्षेत्रीय भाषाएं बोलने वाले लोगों के लिए गहरा झटका साबित होगा. उन्होंने लिखा ‘तमिल और 16 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा से हटाने का फैसला अत्यंत निंदनीय और संघवाद की जड़ों पर प्रहार है. सीबीएसई के , तमिल मातृभाषा वाले छात्र को शिक्षकों के बिना गहरा नुकसान ही होगा.’ कनिमोई ने कहा ‘छात्र अपनी मातृभाषा पढ़ने के बजाय हिंदी और संस्कृत पढ़ने के लिए बाध्य हैं. इससे पूरे देश में एक अन्य भाषा संघर्ष शुरू हो जाएगा. यह हिन्दी – हिन्दू हिन्दुस्तान बनाने की भाजपा की एक और कोशिश है.’

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.