प्राथमिक शिक्षा विभाग की महिला संविदा कर्मियों को अदालत से राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को प्राथमिक शिक्षा विभाग की महिला संविदाकर्मियों के मातृत्व अवकाश के लिए तीन माह में नीतिगत निर्णय लेने का आदेश दिया है। एक याचिका दायर कर न्यायालय के समक्ष फ रियाद की गई थी कि मातृत्व अवकाश की अवधि का मानदेय दिए जाने से प्राथमिक शिक्षा विभाग की ओर से इंकार कर दिया गया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय की एकल सदस्यीय पीठ ने गीता देवी की याचिका पर दिया। याचिका में कहा गया था कि याची ने 180 दिन का मातृत्व अवकाश लिया था लेकिन अब विभाग उसे अवकाश की अवधि का मानदेय दिए जाने से इंकार कर रहा है। याची की ओर से 30 अगस्त 2013 के एक शासनादेश का हवाला दिया गया जिसके अनुसार संविदाकर्मी भी मातृत्व अवकाश के उसी प्रकार हकदार हैं जिस प्रकार सरकारी कर्मचारी। न्यायालय ने राज्य सरकार को दिए अपने निर्णय में कहा कि एक व्यक्तिगत मामले में निर्णय लिए जाने के बजाय उचित होगा कि सरकार सभी संविदाकर्मियों के मातृत्व अवकाश के सम्बंध में नीतिगत निर्णय ले।

न्यायालय ने कुसुमा देवी मामले का जिक्त्र भी किया जिसमें पूर्व में भी सरकार को प्राथमिक शिक्षा विभाग के ही एक ऐसे ही मामले में 17 नवम्बर 2016 को आदेश दिया जा चुका है कि इस सम्बंध में स्पष्ट नीति बनाई जाए। न्यायालय ने कहा कि ऐसे में राज्य सरकार तीन माह के भीतर इस सम्बंध में नीतिगत निर्णय ले। वहीं याची के मामले में न्यायालय ने प्रमुख सचिव प्राथमिक शिक्षा को आदेश दिया कि उक्त शासनादेश व सम्बंधित प्रावधानों को दृष्टिगत रखते हुए याची के मातृत्व अवकाश की अवधि के मानदेय को दिलाय जाना सुनिश्चित किया जाए।Women Samvida Karmchari of Prathmik Shiksha Vibhag

prathmik shiksha vibhag समाचार पढ़ने के लिए आप Primary ka Teacher ब्लॉग को सब्सक्राइब कर सकते है। साथ ही इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर शेयर करें ताकि और लोग भी इस पोस्ट का फायदा उठा सकें।

48 Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.