रसोइये अब एप्रेन-कैप पहन कर पकाएंगे मिड डे मील

प्रयागराज : मध्यान्ह भोजन योजना में काम कर रहे रसोइये अब भोजन पकाते समय एप्रेन व कैप का प्रयोग करेंगे। इसका उद्देश्य भोजन की गुणवत्ता बढ़ाना और साफ-सफाई के स्तर को और सुधारना है। भारत सरकार द्वारा गठित 11 वें ज्वाइंट रिव्यू मिशन के सदस्यों द्वारा विद्यालयों के स्थलीय निरीक्षण में कमियां मिलने के बाद प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस आशय का आदेश दिया गया है।

मध्यान्ह भोजन योजना सर्वोच्च न्यायालय के वर्ष 2001 में दिए गए निर्देश के क्रम में प्रदेश में वर्ष 2004 में लागू की गई। इसमें भारत सरकार व प्रदेश सरकार का संयुक्त प्रयास है। योजना के अंतर्गत प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत सभी छात्रों को मध्यान्ह में विविधतापूर्ण व मीनू के अनुसार गरम पका-पकाया भोजन दिया जाता है।

सरकार द्वारा गठित 11 वें ज्वाइंट रिव्यू मिशन के सदस्यों व अधिकारियों के स्थलीय निरीक्षण में पता चला कि अधिकांश विद्यालयों में मीनू, लोगो दीवार पर प्रिंट नहीं हैं। साथ ही साथ कई विद्यालयों में मीनू प्रिंट हैं पर अस्पष्ट हैं। इससे शिक्षकों व अभिभावकों को मीनू की जानकारी नहीं हो पाती। इसके अलावा रसोइये बिना कैप व एप्रेन के काम करते हैं।

भोजन में कई बार उनके सिर के बाल गिरने की शिकायतें आती रहती हैं। ऐसे में सदस्यों ने रसोइयों को एप्रेन व कैप देने का सुझाव दिया। इस सुझाव के क्रम में निदेशक मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण, अब्दुल समद द्वारा प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को 21 जनवरी 2019 को भेजे गए आदेश में कहा गया है कि रसोइयों को एप्रेन व कैप खरीदकर दिया जाए। बेसिक शिक्षाधिकारी से कहा गया है कि दीवारों पर मीनू छह गुणो चार स्क्वायर फीट व एक गुणो एक स्क्वायर फीट के प्रारूप में समान रूप से पेंटिंग कराई जाए। इसके लिए विद्यालयों को एमएमई मद से 400 रुपये प्रति विद्यालय धनराशि उपलब्ध करा दी गई है। जिन विद्यालयों में मानक के अनुरूप मीनू पेंट किया गया हो वे इस धनराशि का उपयोग फार्म, लेखन सामग्री, साबुन, प्लेट्स, चटाई, कुकिंग डिवाइस आदि की मरम्मत या भंडारन के लिए डिब्बे आदि खरीद सकते हैं।

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