धुयें की आगोश में जाने को फिर तैयार बचपन

अब गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने में अधिक समय नहीं बचा है। एक जुलाई से स्कूल खुलने पर एक बार फिर धुएं की आगोश में जाने के लिए बचपन तैयार हो रहा है। चूल्हे पर खाना पकाने पर रोक के बाद भी कक्षा एक से आठ तक के 911 सरकारी स्कूलों में यह प्रक्रिया अपनाई जाएगी। ऐसा गैस सिलेंडरों के अभाव में होगा।

जिले में 411 सरकारी स्कूलों में अभी भी बच्चों का मिड-डे-मील (एमडीएम) पकाने के लिए गैस कनेक्शन नहीं है। पांच सौ स्कूल ऐसे हैं, जहां गैस कनेक्शन होने के बावजूद खाना चूल्हे पर पकता है। इन स्कूलों में छात्र संख्या इतनी ज्यादा है कि दो गैस सिलेंडर कम पड़ जाते हैं। एमडीएम विभाग के आंकड़ों के हिसाब से जिले में मिड-डे-मील वितरण वाले कुल 2644 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से 2233 में गैस कनेक्शन हैं।

सर्व शिक्षा अभियान के आंकड़े मानें तो गैस कनेक्शन विहीन स्कूलों की संख्या और बढ़ जाती है। ब्लॉकवार 734 जूनियर स्कूल में करीब 36 फीसद के साथ 264 स्कूल और 1776 प्राइमरी स्कूलों में लगभग 25 फीसद के हिसाब से 444 स्कूलों समेत कुल 708 स्कूल गैस कनेक्शन विहीन हैं। चूल्हे पर खाना पका कर बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

शासन के आदेश ताक पर : शासन व मध्याह्न् भोजन प्राधिकरण ने भी बच्चों के स्वास्थ्य के मद्देनजर चूल्हे पर खाना न पकाने के निर्देश दिए हैं। मगर, गैस कनेक्शन न होने के चलते नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं।

कम सिलेंडरों पर चोरी की मार : 1पिछले एक साल के दौरान स्कूलों में करीब 14 चोरी की घटनाएं हुई हैं। इनमें लगभग 20 सिलेंडर चोरी हुए। रिपोर्ट दर्ज हुईं मगर, इनका अभी तक पुलिस कोई सुराग नहीं लगा सकी है।

क्या हो सकती हैं दिक्कतें? फिजीशियन नितिन गुप्ता ने बताया कि लकड़ी का धुंआ फेफड़ों का विकास रोकता है। बच्चों को खांसी, सिरदर्द के अलावा आंखों में जलन की शिकायतें भी आती हैं। गले में जलन होने की समस्या भी होती है। धुएं के बारीक कण शरीर में प्रवेश करके दिल के दौरे और स्ट्रोक का कारण भी बन सकते हैं।

शासन से बजट की मांग की है। प्रयास है जल्द से जल्द चूल्हा प्रथा खत्म हो। ये शासन स्तर की नीतियां हैं, जैसे-जैसे राशि मिलती है, स्कूलों को गैस कनेक्शन उपलब्ध होते हैं। – धीरेंद्र कुमार, बीएसए

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