किताबें गोदाम में, बस्ते खाली

गोंडा: बेसिक शिक्षा परिषद के नए सत्र का आरंभ हुए चार माह बीत चुका है लेकिन छात्रों के हाथों में अभी तक किताबें नहीं पहुंची हैं। जुलाई से किताब वितरण का कार्यक्रम शुरू हुआ है। 10 लाख किताबों को विभिन्न ब्लॉकों में पहुंचाया जा चुका है, लेकिन खंड शिक्षा अधिकारी उसका वितरण नहीं करा रहे हैं। पाठ्य पुस्तकें गोदामों में बिखरी पड़ी हैं। बच्चों के हाथ खाली हैं। ऐसे में वह विद्यालय में बैठकर वापस लौट रहे हैं। आलम यह है कि अभी तक शैक्षिक पंचांग के हिसाब से स्कूलों में पढ़ाई ही नहीं शुरू हुई है।

परिषदीय स्कूलों में 3.60 लाख छात्र नामांकित हैं। शासन इन छात्रों को भोजन से लेकर ड्रेस व किताबें नि:शुल्क देता है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उसका वितरण कराना है। अफसर इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिससे किताबें छात्रों के पास नहीं पहुंचीं। प्रशासनिक अधिकारी मूक दर्शक बने हैं।

नवंबर में होगी परीक्षा परिषदीय स्कूलों में नवंबर में अर्ध वार्षिक परीक्षा होती है। शैक्षिक पंचांग पर आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे लेकिन छात्र अभी विषय से अनजान हैं। किस विषय में कितने पाठ हैं इसकी भी जानकारी नहीं हैं। ऐसे में परीक्षा में उन्हें समस्या का सामना करना पड़ेगा। अधिकारी भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिससे स्थिति दयनीय है।

जिम्मेदार के बोल बेसिक शिक्षा अधिकारी संतोष कुमार देव पांडेय का कहना है कि किताबें स्कूल तक पहुंचाना है। ठेकेदार संस्था को जिम्मेदारी दी गयी है। किताब गोदाम में है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

मुजेहना व तरबगंज में समस्या अधिक कर्नलगंज में विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई किताबों का वितरण किया जा चुका है लेकिन मुजेहना व तरबगंज में किताबें गोदामों में डंप पड़ी हैं। एक सप्ताह पूर्व जिले से गईं किताबों में दीमक लगने का डर है। देखरेख का आलम यह है कि मुजेहना बीआरसी में किताबें बिखरी पड़ी हैं। बीईओ की नजर नहीं पड़ रही है।

पल्लेदार बनाए जा रहे गुरुजी बीआरसी केंद्रों पर डंप किताबों को स्कूल तक भेजवाने के लिए कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी है लेकिन बीईओ की मेहरबानी से उन्हें वितरण से निजात मिली हुई हैं। बीईओ अध्यापकों को ही बीआरसी पर बुला किताब ले जाने को बाध्य कर रहे हैं।

निरीक्षण नहीं करते बीईओ विद्यालयवार शैक्षिक गतिविधियों को समझने के लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को स्कूलों का भ्रमण करने का निर्देश है। निरीक्षण में छात्रों की शैक्षिक स्थिति का आंकलन करने के साथ ही विद्यालय की खामियां समझ में आ जाती हैं लेकिन वह स्कूलों में जाते ही नहीं हैं, जिससे समस्याओं की जानकारी नहीं रहती है।

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