बीएड की फ़र्ज़ी डिग्री से नौकरी प्राप्त करने वाले शिक्षकों पर बर्खास्तगी की तलवार लटकी, 2004 के बाद तैनात शिक्षकों की बीएड डिग्री जांची जाएगी

प्रदेश में बीएड की फ़र्ज़ी डिग्री मामला बड़े जोर शोर से चल रहा है। कई जिलों में तो फ़र्ज़ी बीएड धारी शिक्षक भी पाये गए है। जिनकी अभी जाँच होनी है। बदायूं जिले में जाँच से पता चला है कि 88 शिक्षक बीएड की फ़र्ज़ी डिग्री के साथ शिक्षक बने हुए है। एटा जिले में भी यह मामला सामने आया है। एटा में करीब 29 फर्जी डिग्री धारियों को चिंहित किया गया है। इनमें 8 ऐसे मिले हैं, जिनकी बीएड मार्कशीट पूरी तरह से फर्जी है। 21 द्वारा मैरिट में स्थान बनाने पाने के लिए मार्कशीटें में अधिक अंक बढ़वाकर बनवाने जैसी स्थिति मिली है। अभी तो जाँच शुरू हुई है, अगर जाँच ऐसी ही चलती रही तो प्रदेश में हज़ारों की तादात में फ़र्ज़ी शिक्षक फ़र्ज़ी मार्क शीट के साथ मिलेंगे। अगर शिक्षक ऐसे ही फर्जीवाड़ा कर के शिक्षक बन जाते है तो वो कैसी शिक्षा देंगे ये सभी जानते है।

पढ़ें- मध्य सत्र में शिक्षकों के तबादलों पर लगी रोक

बीएड की फ़र्ज़ी डिग्री से नौकरी प्राप्त करने वाले शिक्षकों पर बर्खास्तगी की तलवार लटकी हुए है। शासन ने फ़र्ज़ी प्रमाण पत्रों से नौकरी प्राप्त करने वालों 4570 शिक्षकों की सूची तैयार कर ली है। अब इन शिक्षकों की वास्तविक पहचान के लिए इनकी बीएड डिग्री की जाँच की जा रही है। सभी शिक्षकों से तीन नवम्बर तक मूल प्रमाण मांगे गए है। विवि के बीएड सत्र 2005 में हुए फजीवाड़े लगभग 4500 से ज़्यदा फ़र्ज़ी मार्कशीट बनाई गई। इन्ही फ़र्ज़ी मार्कशीट से लोगो ने शिक्षा विभाग में नौकरी प्राप्त कर ली। एसआइटी जाँच में ऐसे लोगो के नाम भी सामने गये है। इस सभी नामों की सीडी बनाकर हर जिले के एड़ी बेसिक और बीएसए को भेज दी गई है। भेजी गई सीडी में दिए गए नामों में से बीएसए को अपने यहाँ तैनात शिक्षकों की पहचान करनी है। इस काम में विभाग जुट गया है। फ़र्ज़ी शिक्षकों की पहचान के लिए आगरा में परषदीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में तैनात सभी शिक्षकों की बीएड अंकपत्र की जांच की जा रहा है। बीएसए ने सभी खंड शिक्षाधिकारिओं को निर्देश दिए गए है कि वो अपने खंड में 2004 के बाद तैनात सभी शिक्षकों की मूल अंक तालिका जमा करा ले। बीएसए बताया बीएड की फ़र्ज़ी डिग्री की जाँच के लिए शिक्षकों से मार्कशीट मांगी गई है।

पढ़ें- नर्सरी से 12वीं तक के शिक्षकों के लिए अनिवार्य होगा टीईटी

पिछले कुछ सालों में शिक्षा विभाग में हुई भर्तियों में खूब गड़बड़िया पाई गई है। शिक्षा विभाग जो भर्तियों हुई है उनके मार्क्‍सशीट सत्यापन में भी खूब धाधलेबाज़ी हुई है। भर्तियों के बाद जब मार्क्‍सशीट सत्यापन का नंबर आया तो विवि में सत्यापन में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा शुरू हुआ। फर्जी मार्क्‍सशीट वालों से विवि कर्मचारियों द्वारा सेटिंग कर ली गई और फर्जी सत्यापन रिपोर्ट बना दी गई। एसआइटी जाँच से लगभग फर्जी सत्यापन के करीब 100 मामले सामने आए। हाईकोर्ट ने इन सभी मामलों की जांच एसआइटी को बीएड फर्जीवाड़े के साथ ही करने के निर्देश दिए थे।

पढ़ें- 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती, विज्ञापन दिसंबर में

एटा जिले में 2004 -2005 में डिग्रियों के सत्यापन में जम कर फर्ज़ीवाड़े का खेल चला था। जिले में फ़र्ज़ी डिग्रियां बेचने का गरोह सक्रिय है। यह गरोह बीएड की फ़र्ज़ी मार्कशीट भी तैयार करता है। इसके बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय चल रैकेट जरिये इनका सत्यापन करता है। 2004 -2005 में तमाम युवओं ने एक से दो लाख रूपये में इन डिग्रियों को हासिल कर लिया है। अब ऐसे में फ़र्ज़ी डिग्रियों वाले शिक्षक परेशान है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *