बेसिक शिक्षकों की नौकरी पर गहराया संकट

बेसिक शिक्षा परिषद के तहत जिले के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 600 शिक्षकों की नौकरी हाई कोर्ट के आदेश पर जाना लगभग तय है। हाई कोर्ट के लपेटे में आए शिक्षकों के बीच खलवली मची हुई। नौकरी जाने के भय से शिक्षकों का भविष्य अंधकार में फंस सकता है। हालांकि हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अभी शासन से शिक्षकों की नौकरी समाप्त करने का आदेश नहीं आया है। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने बीएड व बीटीसी का रिजल्ट आने के पहले ही टीईटी का मूल आधार मानते हुए यह आदेश जारी किया है। शिक्षक भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2012 से 2018 के बीच के 15000 , 16488 और 12460 भर्ती के चयनित शिक्षक हाई कोर्ट की लपेट में आ गए है। बीएड व बीटीसी के प्रशिक्षुओं का रिजल्ट आने के बाद तथा उसी दौरान टीईटी का रिजल्ट आया है। यह विवाद हाई कोर्ट के सिंगल बेंच में चला।

हाईकोर्ट ने शिक्षक के पद नहीं माना तो डबल बेंच में मुकद्दमा चला। डबल बेंच ने प्रदेश के 50 हज़ार शिक्षकों हटाने का आदेश पारित किया है। हाई कोर्ट के आदेश से जिले के 600 शिक्षक प्रव्हावित हो रहे है। हलाकि शिक्षक भर्ती 29334 गणित विज्ञानं सहायक अध्यापक भर्ती 2011 के लिए खास तौर से है। मगर अन्य भर्ती प्रक्रिया में नियुक्त में बीएड व बीटीसी करने के दौरान ही टीईटी का रिजल्ट आने या फिर उसके बाद नतीजा आने के बाद टीईटी का रिजल्ट आने वाले शिक्षक शामिल है।

हाईकोर्ट के आदेश बाद परिषदीय विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों और उन शिक्षकों बीएड व बीटीसी योग्यताधारी शिक्षकों के बीच खलबली मची है, जो बाद में टीईटी किए है। शुक्रवार को पर्यावरण पार्क में इन शिक्षकों ने बैठक कर कोर्ट के आदेश बाद उपजे संकट के हल पर मंथन किया। शिक्षकों ने हाईकोर्ट की डबल बेंच के फेसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर करने के बारे में सभी शिक्षकों की राय जानी। नौकरी बचने के लिए दायर होने वाली वाले मुकदमे की पैरवी के लिए सहयोग का भरोसा दिया। 72000 शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष चित्रसेन रॉय, जीतेन्द्र मौर्य, मुनेंद्र मिश्र, आवेश विक्रम सिंह, कृष्णंमोहन व प्रवीण तिवारी ने सभी को भरोसा दिया कि सुप्रीम कोर्ट से उनके हक में फसल आएगा। प्राथमिक शिक्षक संघ के संगठन मंत्री डॉ. विनय प्रजापति ने शिक्षकों के साथ पूरी तरह से सहयोग करने का भरोसा दिया। यहाँ अनुपम पांडेय, संतोष सिंह, कौशिक सिंह, पंकज सिंह, मनीष जीतेन्द्र रहे।

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