बार कोडिंग की खामी और अंकों की हेराफेरी, कई सवालों का जवाब नहीं दे सके अफसर

इलाहाबाद : शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में शामिल होने वाले एक अभ्यर्थी को सोमवार को कॉपी मुहैया कराई गई। उसे रिजल्ट में 66 अंक मिले थे, कॉपी पर भी इतने ही अंक दर्ज मिले लेकिन, दो प्रश्नों में दिया गया एक-एक अंक कुल अंकों में जुड़ा नहीं था। इससे वह अनुत्तीर्ण हो गया। यदि ये अंक सही से जोड़ दिए गए होते तो वह उत्तीर्ण होता।

68500 शिक्षक भर्ती परिणाम में ऐसी ही खामी हर उत्तर पुस्तिका के साथ सामने आ रही है। अब तक एक भी ऐसी कॉपी सामने नहीं आ सकी है, जिसका मूल्यांकन यानि प्रश्नों को अंक देने में खामी उजागर हुई हो। अधिकांश प्रकरणों में अंक दर्ज करने, उन्हें जोड़ने और अंकों को दूसरे के खाते में दर्ज करने की ही जमकर गड़बड़ी हुई है। इसके पहले जिन अभ्यर्थियों को कोर्ट के आदेश पर कॉपी मुहैया कराई गई वह चाहे अंकित वर्मा हो या मनोज कुमार भले ही रिजल्ट में मिले अंकों से असंतुष्ट रहे हैं लेकिन, कॉपी पर दर्ज अंकों पर अभी तक सवाल नहीं किया है। सब्जेक्टिव परीक्षा में तेजी से हुए मूल्यांकन में भी कॉपियों की जांच काफी हद तक सही मानी जा रही है लेकिन, अंकों की हेराफेरी रिजल्ट को कटघरे में खड़ा कर रहा है।

इसमें अभ्यर्थी की पहचान छिपाने के लिए बार कोडिंग प्रक्रिया भी पारदर्शिता की जगह गड़बड़ी को बढ़ाने में ही सहायक बनी है। सूत्रों की मानें तो अंकों की इसी हेराफेरी ने बिना परीक्षा में बैठने वालों को उत्तीर्ण किया और अनुत्तीर्ण होने वाले चयनित सूची में शामिल होने में सफल रहे। भले ही उन्हें नियुक्ति पत्र मिलने से पहले खामी पकड़ में आ गई लेकिन, इस प्रक्रिया से पूरी भर्ती कलंकित हो गई। इसमें भले ही कार्यदायी एजेंसी या फिर शिक्षकों ने अंक चढ़ाने में गलती की हो लेकिन, इसे मानवीय भूल कहकर माफ भी नहीं किया जा सकता। बल्कि ये प्रकरण अन्य भर्ती संस्थाओं के लिए बड़े सबक की तरह हैं।

घोटाले को लेकर राजभवन पहुंचे सपाई: : समाजवादी पार्टी ने सोमवार को शिक्षक भर्ती घोटाले समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर राज्यपाल राम नाईक को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप करने की मांग की। विधान परिषद में नेता विरोधी दल अहमद हसन के नेतृत्व में राजभवन पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में नरेश उत्तम पटेल, राजेंद्र चौधरी, आरके चौधरी, शैलेंद्र यादव ललई, बासुदेव यादव व सुनील सिंह साजन भी शामिल थे। ज्ञापन में बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता जताते हुए किसान-नौजवानों के आत्महत्या करने की बात कही। प्रदेश की ध्वस्त कानून व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा टिप्पणी करने के बाद भी सरकार की चुप्पी पर रोष जताया। ज्ञापन में कहा गया कि आरएसएस का एजेंडा, जातिवाद, सांप्रदायिकता के कारण समाज को तोड़ने का कार्य किया जा रहा है।

कई सवालों का जवाब नहीं दे सके अफसर:  हटाए गए दोनों अफसरों ने जांच टीम को बताया कि जानबूझकर किसी को फेल या पास नहीं किया गया है। जांच सदस्यों ने अंक दर्ज न होने वाले प्रकरणों की एक प्रति ली है व दूसरी प्रति को सील कराया है। कई प्रश्नों का जवाब आरोपित नहीं दे सके। वहीं, कुछ कर्मचारियों से भी अलग से पूछताछ और फिर आरोपित अफसरों के सामने भी सवाल पूछे गए। यह प्रक्रिया देर शाम तक चली है। अफसर मीडिया से पूरे समय दूरी बनाए रहे।

शासन को रिपोर्ट जल्द: जांच सदस्य इस मामले की रिपोर्ट अब समिति के अध्यक्ष चीनी उद्योग व गन्ना विकास के प्रमुख सचिव संजय आर भूसरेड्डी को देंगे। समिति अध्यक्ष तय जांच अवधि के पहले ही शासन को विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे।

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