टीईटी 2018 में सात साल के अंतराल के बाद बीएड डिग्रीधारी सम्मिलित होंगे

रविवार को होने जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2018 के प्राथमिक स्तर के पेपर में सात साल के अंतराल के बाद बीएड डिग्रीधारी सम्मिलित होंगे। अप्रैल 2010 में नि: शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार कानून लागू होने के बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने उत्तर प्रदेश सरकार को 2011 में प्राथमिक स्कूलों में हुई 72825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती में आखिरी बार बीएड डिग्रीधारियों को शामिल करने की अनुमति दी थी।.

इस प्रकार 13 नवंबर 2011 को सूबे में पहली बार आयोजित टीईटी में बीएड डिग्रीधारियों को मौका मिला था। उसके बाद एनसीटीई की गाइडलाइन के अनुसार बीएड वालों को प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक पद की भर्ती से बाहर कर दिया गया था। 72825 शिक्षक भर्ती के बाद प्राथमिक स्कूलों में आधा दर्जन से अधिक बार सहायक अध्यापकों की भर्ती हुई लेकिन बीएड डिग्रीधारकों को मौका नहीं मिला। सात साल के लंबे अंतराल के बाद 28 जून को एनसीटीई ने फिर से बीएड डिग्रीधारियों को प्राथमिक स्कूलों की भर्ती में शामिल कर लिया है।.

परीक्षा केंद्रों पर होगी वीडियो रिकार्डिंग : टीईटी के दौरान परीक्षा केंद्रों के गेट पर वीडियो रिकार्डिंग की जाएगी। इस आशय के निर्देश शासन स्तर से जारी किए गए हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि ताकि प्रवेश के वक्त अगर कोई विवाद की स्थिति बनती है तो उसे कैमरे में कैद किया जा सके। प्रश्न पत्र का बंडल खोलते वक्त भी वीडियो रिकार्डिंग की जाएगी।

पिछले साल टीईटी-17 में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए क्रमश: 349192 एवं 627568 कुल 976760 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी हुआ था। वहीं टीईटी-18 के लिए 1783716 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किया गया है। जिनमें प्राथमिक स्तर के लिए 1170786 और उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए 612930 अभ्यर्थी हैं। प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए तीन गुना से अधिक अभ्यर्थियों का इजाफा बीएड डिग्रीधारियों के कारण ही हुआ है।

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