बढ़ेगी राज्य अध्यापक पुरस्कार की रकम और संख्या, योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों को दिखाया आईना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को शिक्षक दिवस पर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में दिये जाने वाले राज्य अध्यापक पुरस्कारों की धनराशि और संख्या दोनों बढ़ाने का एलान किया। राज्य अध्यापक पुरस्कार की राशि को उन्होंने 10 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की घोषणा की। वहीं यह भी कहा कि इन पुरस्कारों में प्रदेश के हर जिले को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। आशय था कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए दिए जाने वाले राज्य अध्यापक पुरस्कारों की संख्या अब 75 होनी चाहिए। अभी बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में 17 और माध्यमिक शिक्षा से जुड़े आठ शिक्षकों व एक शिक्षक प्रशिक्षक को राज्य अध्यापक पुरस्कार दिया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य अध्यापक पुरस्कार पाने वाले बेसिक शिक्षकों को 65 वर्ष की आयु तक सेवा1 विस्तार देने का भी एलान किया। इससे पुरस्कार पाने वाले परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को दो की बजाय अब तीन वर्ष का सेवा विस्तार मिल सकेगा।

नेताओं की सिफारिश पर न दें पुरस्कार : लोक भवन में आयोजित राज्य अध्यापक पुरस्कार समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षा से जुड़े अधिकारियों को नेताओं की सिफारिश पर शिक्षकों को पुरस्कार कतई न देने की हिदायत दी। यह कहते हुए कि अपात्र व्यक्ति को सम्मान देकर आप पूरी पीढ़ी के साथ अन्याय करते हैं। उन्होंने शिक्षक पुरस्कारों के लिए केंद्र सरकार द्वारा पद्म पुरस्कारों के लिए लागू की गई ऑनलाइन व्यवस्था को अपनाने का निर्देश दिया।

शिक्षकों को दिखाया आईना : मुख्यमंत्री ने जहां पिछले पांच महीने के दौरान बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में हुए सुधार की सराहना की, वहीं शिक्षा क्षेत्र में आई गिरावट के लिए शिक्षकों को आईना भी दिखाया। समारोह में उपस्थित शिक्षकों से उन्होंने कहा कि हमारे पास विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और अच्छे स्कूल भी हैं लेकिन दुनिया के शीर्ष शिक्षण संस्थानों की रेटिंग में भारत और उप्र गायब हैं। ऐसा क्यों? आज क्यों देश और उप्र शिक्षा के अंतिम पायदान पर खड़ा है? यह भी सवाल किया कि कब उप्र पहले की तरह देश और विदेश में योग्य शिक्षकों का निर्यातक बन पाएगा? शिक्षकों का आह्वान किया कि शिक्षा जगत की शिकायतों का हल उन्हें खुद ढूंढ़ना होगा। आती-जाती सरकारों पर यह दायित्व थोपने से कुछ हासिल नहीं होगा। उन्होंने प्रदेश के उस परिषदीय विद्यालय के प्रधानाध्यापक की सराहना की जिन्होंने अपने प्रयास से सकूल में बच्चों की संख्या को 36 से 300 पहुंच दिया।

छात्रों को प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाएं : योगी ने कहा कि आज बाटा सबसे बड़ा मोची बन गया है और गांव का मोची बेरोजगार। क्या शिक्षा जगत नहीं सोचेगा कि कैसे हम अपने छात्रों को इस प्रतिस्पर्धा का सामना करने के योग्य बनाएं। 1अभी से करें नकलविहीन परीक्षा की तैयारी : योगी ने अगले साल होने वाली परीक्षाओं को नकलविहीन संपन्न कराने के लिए अभी से तैयारियां करने के लिए कहा। दागी परीक्षा केंद्रों को प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया।

शिक्षक सोचें क्यों पड़ी बायोमेटिक हाजिरी की जरूरत : दिनेश शर्मा अपने संबोधन में उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने कहा कि नवंबर तक राज्य विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पद भर दिये जाएंगे। वहीं जल्द ही उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का पुनर्गठन कर शिक्षकों की भर्ती शुरू की जाएगी। उन्होंने शिक्षकों से इस बात पर विचार करने के लिए कहा कि आखिर सरकार को शिक्षकों की बायोमेटिक हाजिरी लगवाने के बारे में क्यों सोचना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि निजी स्कूलों की फीस नियंत्रित करने की नियमावली जल्दी लागू की जाएगी। अगले सत्र से यूपी बोर्ड के मान्यताप्राप्त स्कूलों में लागू किये जाने वाले एनसीईआरटी कोर्स में 30 फीसद पाठ्यक्रम यूपी बोर्ड का भी होगा। संस्कृत शिक्षा के उत्थान के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के अभिनव गुप्त संस्थान का कायाकल्प किया जाएगा। समारोह को बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार अनुपमा जायसवाल और राज्य मंत्री संदीप सिंह ने भी संबोधित किया।

उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 40 शिक्षक सम्मानित : इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 40 शिक्षकों को सम्मानित किया। सम्मानित किये गए शिक्षकों में 17 बेसिक, आठ माध्यमिक और 15 उच्च शिक्षा से जुड़े हैं। बेसिक और माध्यमिक शिक्षकों को पुरस्कारस्वरूप 10 हजार रुपये के चेक प्रदान किये गए। वहीं उच्च शिक्षा के लिए सरस्वती सम्मान से अलंकृत शिक्षकों को तीन लाख रुपये और शिक्षक श्री सम्मान से विभूषित अध्यापकों को डेढ़ लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई।

सरस्वती सम्मान (वर्ष 2016)

प्रो.नीलिमा गुप्ता, एनिमल साइंस विभाग, एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली ’ डॉ.शशि मलिक, असिस्टेंट प्रोफेसर शिक्षाशास्त्र, विद्यावती मुकुंदलाल महिला महाविद्यालय, गाजियाबाद।’ प्रो.राजीव मनोहर, भौतिकी विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय1’ प्रो.सौमित्र कुमार सेनगुप्ता, रसायनशास्त्र विभाग, पं.दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय1’ डॉ.मो.सेराजउद्दीन, प्राणि विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय1’ डॉ.भाष्कर शुक्ल, असिस्टेंट प्रोफेसर शारीरिक शिक्षा, हेमवंती नंदन बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नैनी, इलाहाबाद’ डॉ.श्री प्रकाश, सहायक आचार्य, जंतु विज्ञान, कुलभाष्कर आश्रम पीजी कॉलेज, इलाहाबाद’ डॉ.संजीव कुमार शुक्ल, असिस्टेंट प्रोफेसर , श्री गांधी महाविद्यालय, सिधौली, सीतापुर।’ प्रो.एचएस शुक्ल, गणित एवं सांख्यिकी विभाग, पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय1’ प्रो.अरविंद कुमार, वाणिज्य विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय’ डॉ.ज्ञान प्रकाश यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर मैनेजमेंट, उप्र राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद’ डॉ.गीता सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर हंिदूी, डीएवी पीजी कॉलेज, आजमगढ़।’ प्रो.ओमकार, प्राणि विज्ञान विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय1’ डॉ.अशोक कुमार वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर जंतु विज्ञान, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सैदाबाद, इलाहाबाद1’ डॉ.गायड सिंह राठौर, एसोसिएट प्रोफेसर, उदय प्रताप महाविद्यालय, वाराणसी।

यह प्रिंसपलवा तो है मुख्यमंत्री ने एक घटना का जिक्र करते हुए शिक्षा जगत में आयी गिरावट का अपना अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल के एक जिले से गुजरते हुए एक मंदिर देखकर वह रुक गए। मंदिर के बगल में ही एक इंटर कॉलेज था जिसके बाहर तीन-चार बच्चे भैंस चरा रहे थे जिन्हें उन्होंने अपने पास बुलाया। उनके आने की खबर सुनकर कॉलेज के प्रिंसिपल भी उनसे मिलने चले आए। जब उन्होंने प्रिंसिपल की ओर इशारा कर बच्चों से पूछा कि इन्हें पहचानते हो तो दो-तीन बच्चों ने नाक-भौं सिकोड़ते हुए मुंह घुमा लिया लेकिन एक ने कहा ‘हां, यह प्रिंसपलवा तो है।’ प्रिंसिपल के प्रति बच्चों का यह रवैया देखकर मुख्यमंत्री भौचक रह गए।
तोहफा

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