एडेड कॉलेजों के शिक्षकों के प्रमोशन का रास्ता साफ हुआ

अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों के जो शिक्षक 28 मई 2015 की कट ऑफ डेट के बाद ओरियंटेशन और रिफ्रेशर कोर्स पूरा करेंगे, उन्हें प्रमोशन के सभी लाभ देयता तिथि यानी 28 मई 2015 से दिये जाएंगे। शुक्रवार को सचिवालय में उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा के साथ लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ ‘लुआक्टा’ के पदाधिकारियों की बैठक में इस पर सहमति बनी है। इससे एडेड कॉलेजों के शिक्षकों के प्रमोशन की बाधा दूर होगी।

बैठक में शिक्षकों के परीक्षा पारिश्रमिक की वर्तमान दरों को वित्त विभाग की सहमति के बाद दोगुना किये जाने पर भी सहमति बनी। उप मुख्यमंत्री ने लुआक्टा को आश्वस्त किया कि राज्य कर्मचारियों की ही तरह उच्च शिक्षा विभाग के जो शिक्षक जनवरी 2006 से जून 2006 के बीच नियुक्त हुए हैं, उन्हें एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि दिये जाने पर राज्य सरकार विचार करेगी।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों के सीपीएफ की कटौती यथाशीघ्र की जाएगी। अशासकीय महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए लागू सामूहिक जीवन बीमा योजना में की जाने वाली कटौती की आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष तक की जाएगी। नैक से ‘ए’ ग्रेड प्राप्त महाविद्यालयों में यूजीसी का वेतनमान जारी रहेगा। महाविद्यालयों के शिक्षकों को प्रोफेसर का पदनाम दिये जाने, विनियमितीकरण से वंचित मानदेय शिक्षकों को विनियमित करने, कैशलेस चिकित्सीय सुविधा आदि दिये जाने की मांग पर उप मुख्यमंत्री ने इस पर सकारात्मक रूप से विचार करने का आश्वासन दिया। बैठक में लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ.मनोज पांडेय, विशेष सचिव उच्च शिक्षा मधु जोशी व शंभु कुमार, निदेशक उच्च शिक्षा आरपी सिंह भी मौजूद थे।

लखनऊ : राज्य विश्वविद्यालयों के शिक्षणोत्तर कर्मचारियांे की सेवा नियमावली बनायी जाएगी। शिक्षणोत्तर कर्मचारियों को पंेशन का भुगतान ट्रेजरी के जरिये करने पर सरकार विचार करेगी। शुक्रवार को सचिवालय में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के साथ उप्र राज्य विश्वविद्यालय कर्मचारी महासंघ के प्रतिनिधियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। उप मुख्यमंत्री ने सेवा नियमावली बनाने और ट्रेजरी से पेंशन भुगतान करने के बारे में अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का निर्देश दिया।

यह समिति सेवा नियमावली के बारे में दो महीने में अपनी रिपोर्ट शासन को देगी। सभी विश्वविद्यालय इस सेवा नियमावली को लागू करेंगे। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रेजरी से पंेशन दिये जाने के बारे में कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद वित्त विभाग से सहमति प्राप्त होने पर ही इसे लागू किया जा सकेगा। विश्वविद्यालयों में विभिन्न पदों पर व्याप्त वेतन विसंगति को दूर करने के बारे में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों से प्रस्ताव मिलने पर वित्त विभाग की सहमति से विचार कर इस बारे में निर्णय लिया जाएगा।

राज्य कर्मचारियों की तरह शिक्षणोत्तर कर्मचारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति तथा एलटीसी की सुविधा दिये जाने के विषय में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कुलपतियों की बैठक में इस पर विचार किया जाएगा। विश्वविद्यालय कार्य परिषद तथा अन्य समितियों में कर्मचारियों को प्रतिनिधित्व दिये जाने का निर्णय भी कुलपतियों की बैठक में ही लिया जायेगा। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद 300 दिनों के अवकाश नकदीकरण की सुविधा का प्रकरण वित्त वेतन आयोग में विचाराधीन है तथा इस पर विचार विमर्श कर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षणोत्तर कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष किया जाना संभव नहीं है।विश्वविद्यालयों के शिक्षणोत्तर कर्मियों की बनेगी सेवा नियमावली

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