68,500 सहायक अध्यापक भर्ती के लिए बनाई गाइड लाइन पर सरकार से जवाब तलब

इलाहाबाद : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक बनने को बड़ी संख्या में आवेदन हो रहे हैं। ऑनलाइन आवेदन शुरू होने के महज सात दिनों में ही 95 हजार 652 अभ्यर्थियों ने आवेदन कर दिया है। यह संख्या अभी और बढ़ेगी, क्योंकि पंजीकरण कराने के लिए अभी पांच फरवरी तक का समय है। वहीं, परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने परीक्षार्थियों के लिए मॉडल प्रश्नपत्र भी वेबसाइट पर जारी किया है।

परिषद के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा 12 मार्च को होनी है। 68500 शिक्षकों की भर्ती के लिए बीते 25 जनवरी अपरान्ह से ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं। इसमें वही अभ्यर्थी दावेदारी कर सकते हैं, जो टीईटी उत्तीर्ण और प्रशिक्षित हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय उप्र के अनुसार 31 जनवरी की शाम तक 95 हजार 652 पंजीकरण व आवेदन हो चुके हैं। यह प्रक्रिया अभी नौ फरवरी तक चलनी है। ऐसे में माना जा रहा है कि डेढ़ लाख से अधिक दावेदार होंगे। ज्ञात हो कि पंजीकरण की अंतिम तारीख पांच फरवरी व ऑनलाइन आवेदन नौ फरवरी को शाम छह बजे तक स्वीकार होंगे। परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव डा. सुत्ता सिंह ने बताया कि परीक्षार्थियों की सुविधा को देखते हुए परीक्षा 2018 का मॉडल पेपर तैयार किया गया है। अभ्यर्थी उसे वेबसाइट ार देख सकते हैं।

यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि पहली बार की परीक्षा में सवालों व उत्तर देने के तरीके को लेकर असमंजस न रहे। योगी सरकार की पहली सबसे बड़ी भर्ती सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हो रही है। कोर्ट ने 25 जुलाई को शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बनने वालों का समायोजन निरस्त कर दिया था और सरकार को निर्देश दिया कि इन अभ्यर्थियों को शिक्षक बनने के लिए दो अवसर मुहैया कराए जाएं। उसी क्रम में इम्तिहान हो रहा है।

सहायक अध्यापक भर्ती की गाइड लाइन पर सरकार से जवाब तलब: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती के लिए बनाई गई गाइड लाइन और संशोधित नियमों की वैधता चुनौती याचिका पर राज्य सरकार से जानकारी तलब की है। सुनवाई एक फरवरी को भी होगी। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले तथा न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने विद्याचरण शुक्ल की याचिका पर दिया है। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता एचएन सिंह का कहना है कि अनिवार्य शिक्षा कानून 2009 की धारा-23 के तहत केंद्र सरकार की अधिसूचना से गठित एकेडमिक अथॉरिटी को ही योग्यता व गाइड लाइन तय करने का अधिकार है। राज्य सरकार को गाइड लाइन बनाने, न्यूनतम या आवश्यक अर्हता तय करने का अधिकार नहीं है। राज्य सरकार ने बिना अधिकार के अर्हता की गाइड लाइन तय की है, जो कानूनन गलत है। कहा कि एनसीटीई की ओर से निर्धारित गाइड लाइन व न्यूनतम अर्हता का पालन सभी राज्यों को करना अनिवार्य है। याची का कहना है कि शीर्ष कोर्ट ने न्यूनतम अर्हता न रखने के कारण शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद करते हुए लगातार दो वर्षो में टीईटी परीक्षा पास करने का समय दिया है।

 

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