एक ही गांव के 44 शिक्षक पुलिस के रडार पर

मथुरा: शिक्षक भर्ती घोटाले में पुलिस की पैनी नजर जमुनापार थाने के गांव कारब पर है। इस गांव में सौ से अधिक लोग शिक्षक बन गए हैं। इनमें से तमाम ने फर्जी कागजातों के सहारे नौकरी पाई है। घोटाले का मास्टर माइंड भी इसी गांव का है। पुलिस के निशाने पर यहां के 44 लोग हैं। इनमें से अभी तक दो ही पुलिस के हत्थे चढ़े हैं। शिक्षक भर्ती घोटाले में एसटीएफ की ओर से पकड़े गए 16 आरोपितों में दो गांव कारब के हैं। पूछताछ के पुलिस को पता चला है कि इस गांव के 44 के दस्तावेज फर्जी हो सकते हैं। पुलिस इनके खिलाफ मजबूत तथ्य एकत्रित कर कार्रवाई की तैयारी कर रही है। साथ ही पता चला कि कारब गांव के शिक्षकों के बीच पारिवारिक रिश्ते हैं। किसी को पता नहीं चले इसके लिए शिक्षा विभाग में जमा कराए दस्तावेजों में पते तक बदल दिए गए हैं।

घोटाले का मास्टर माइंड गांव कारब का है। यह ही फर्जी दस्तावेज तैयार कर 10 से 15 लाख रुपये वसूल कर नौकरी लगवाता रहा है। इस मास्टर माइंड के हाथ मथुरा के अलावा हाथरस, अलीगढ़, कासगंज, आगरा तक फैले होने की जानकारियां भी पुलिस को मिल रही हैं। पुलिस का दावा है कि बीएसए कार्यालय के बंद कमरे से भी महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लग सकते हैं। यह दस्तावेज रैकेट की कड़ियों को सुलझाने में भी सहायक सिद्ध होंगे। रैकेट अलग-अलग गुट में रहकर कार्य करता था। कोई गुट फर्जी दस्तावेज तैयार कराता तो कोई नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों को फंसता था। इन सब गुटों के तार कारब के सदस्यों से ही जुड़ते रहे हैं। पुलिस ने कारब में कई बार दबिश भी दी है, लेकिन बड़ी सफलता नहीं मिली है। पुलिस पूरे नेटवर्क को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए तैयारी कर रही है।

शिक्षक भर्ती घोटाले की पुलिस जांच में मास्टर माइंड के रूप में एक नाम बाबू का भी सामने आया है। मास्टर माइंड बाबू मथुरा में बीएसए और डीआइओएस कार्यालय के अलावा अलीगढ़ में भी तैनात रहा है। इस बाबू ने अलीगढ़ में भी शिक्षकों की भर्ती कराई है। अलीगढ़ शिक्षक भर्ती में मथुरा के शिक्षकों की अच्छी खासी संख्या है। पुलिस का मानना है कि इस बाबू से पूछताछ में शिक्षक भर्ती घोटाले के दफन कई राज बाहर आ सकते हैं, जो जांच में मददगार होंगे। मथुरा में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले में भले ही पुलिस के हाथ अब तक सभी दस्तावेज नहीं लगे हों, लेकिन इस खेल के मास्टर माइंड की कड़ियां जोड़ना शुरू कर दिया गया है। इस खेल के महारथियों के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल से पता लगाया जा रहा है कि कौन-कौन खिलाड़ी कैसे-कैसे खेल रहा था। इस घोटाले के रैकेट से जुड़े लोगों के बैंक अकाउंट और संपत्ति का ब्योरा भी खंगाला जा रही है।

पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई महत्पूृवर्ण तथ्य पुलिस के हाथ लग रहे हैं। पुलिस विवेचना में अब एक और नाम प्रकाश में आया है। इसके तार डीआइओएस और बीएसए कार्यालय से जुड़े रहे हैं। यह बाबू अलीगढ़ में तैनात रहा तो वहां भी अपना रंग दिखाया और मथुरा के कई लोगों को अलीगढ़ में तैनात कराया है। अलीगढ़, आगरा घूमने के बाद भी बाबू मथुरा को मोह नहीं छोड़ सका और साठगांठ कर मथुरा में तैनाती करा ली। मथुरा के शिक्षक भर्ती घोटाले में पुलिस इस बाबू की महत्वपूर्ण भूमिका मानी ज ारही है। पुलिस बाबू के फोन की कॉल डिटेल निकलवा रही है, ताकि पता लगाया जा सके कि उसके संपर्क में कौन-कौन थे। यह भी पता किया जा रहा है कि इस बाबू के पास कोई प्राइवेट मोबाइल नंबर तो नहीं था, जिससे इस फर्जी शिक्षक भर्ती घोटालों के तार जुड़े हों। वहीं विज्ञान और गणित शिक्षकों की भर्ती में भी इसी बाबू काफी नजदीकियां रहीहैं।

12,800 शिक्षक भर्ती के मामले में एक ऐसे लिपिक की भूमिका की जांच की जा रही है जो डीआइओएस दफ्तर में तैनात रहा है। पहले यह शख्स बीएसए दफ्तर में तैनात था। किसकी कितनी भूमिका है यह जांच के बाद ही पता चलेगा। प्रभाकर चौधरी, एसएसपी

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