शासन की जांच के दायरे में जनपद के 258 मदरसे, पंजीकरण न कराने वाले 102 मदरसों की मान्यता पर संकट

प्रदेश सरकार द्वारा मदरसों की जाँच के लिए गठित कमेटी ने उन मदरसों की जांच शुरू कर दी है। जोकि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा चिन्हित किये गये मदरसे है। इस जाँच के दायरे में प्रदेश के दर्जनों मदरसे आ सकते है। प्रदेश सरकार द्वारा मदरसों की जाँच के लिए मंडल स्तर पर अधिकारी पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं। इस जाँच की शुरूआत वेबसाइट पर पंजीकृत मदरसों पर उपलब्ध संसाधनों, शिक्षकों की संख्या सहित विभिन्न पहलूओ पर होगी। मुख्य रूप से मदरसों के भवन, शिक्षक-कर्मचारी, प्रबंध समिति और भूमि का सत्यापन होगा।

प्रदेश सरकार द्वारा दी जानकारी पता चला कि जनपद में 360 मदरसे है। जिनमें से 258 मदरसों ने ही प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर अपनी जानकारी उपलब्ध कराई है। जिन मदरसों ने जानकारी उपलब्थ नहीं कराई ऐसे 120 मदरसे है ऐसे में इन मदरसों की मान्यता खतरे में पड़ सकती हैं। प्रदेश सरकार 15 अक्टूबर तक जनपद के सभी मदरसों का डाटा लॉक कर देगी जिससे उन मदरसों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा जिन मदरसों ने अपनी जानकारी प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध अब तक नहीं कराई।

जिला अल्पसंख्यक अधिकारी एसपी तिवारी ने बताया है कि शासन की जांच के दायरे में वित्तविहीन और वित्तीय सहायता प्राप्त दोनो ही मदरसे आएंगे। इनमें 150 मदरसे ऐसे भी हैं जो मदरसा आधुनिकीकरण योजना से आच्छादित हैं। एसपी तिवारी ने बताया कि दीनी मकतबों की जांच के मुख्य रूप से भवन, प्रबंध समिति, शिक्षक एवं जमीन आदि की जांच होनी है। और उन्होंने बताया कि जो मदरसे जाँच नहीं कराएंगे तो उन मदरसों को भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। शासन द्वारा पहले ही मानकों के दिशा निर्देश जारी किए जा चुके है जिससे पंजीकरण होने वाले मदरसों के डाटा सटीक और मानकों के अनुरूप हो। मदरसों का डाटा लॉक करने से पहले मानकों का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा। नवंबर के अंत तक रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर मदरसों को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा।

खतरे में हैं पंजीकरण नहीं कराने वाले मदरसे

जिन मदरसों ने अभी तक प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर पंजीकरण नहीं कराया है तो उनकी मान्यता खतरे में पड़ सकती है। अगर जाँच में किसी मदरसे के खिलाफ अनियमितता की शिकायत मिलती है तो उस मदरसे का अनुदान और मान्यता दोनो निरस्त किया जा सकता है। हालांकि ऐसे मदरसों को पहले नोटिस देकर सुनवाई का मौका मिलेगा। इसके बाद शासन द्वारा अंतिम फैसला लिया जाएगा। सरकार का प्रयास होगा कि मदरसों की कमियां दूर कर उसमें उच्च श्रेणी की सुविधा देकर शिक्षा का स्तर सुधारा जाए।

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